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चुनाव आयोग में कथित मतभेद पर NDA में भी हलचल, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और TDP ने मांगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा 

चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित मतभेदों को लेकर सामने आई जानकारी के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्ष के बाद अब सत्तारूढ़ NDA के तीन सहयोगी दलों ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

मामला उस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चर्चा में आया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों और आदेशों पर लगभग 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटा के प्रबंधन और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ ऐसे आदेशों और फैसलों पर भी सवाल उठाए, जिन्हें उनकी सलाह या सहमति के बिना जारी किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।

चिराग पासवान ने कहा- जनता का भ्रम दूर करे आयोग

NDA के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस मामले पर चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और सरकार में रहते हुए उनका काम किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपने राजनीतिक हितों के लिए आरोप लगा सकता है, लेकिन यदि चुनावी प्रक्रिया को लेकर आम लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है तो उसे दूर करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को किसी नेता को जवाब देने की जरूरत नहीं है, लेकिन जनता के मन में पैदा हुए भ्रम और गलतफहमियों को दूर करने के लिए आयोग को मजबूती से अपनी स्थिति सामने रखनी चाहिए।

उपेंद्र कुशवाहा ने मांगा तत्काल आधिकारिक बयान

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और NDA के सहयोगी नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से तत्काल आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता। चुनाव आयोग को बिना देरी किए वास्तविक स्थिति सामने रखनी चाहिए, ताकि लोगों के बीच फैले भ्रम को दूर किया जा सके।

TDP ने पारदर्शिता पर दिया जोर

NDA की एक अन्य सहयोगी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी ने भी चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।

TDP के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया को करीब से देखा गया और वहां लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठने की स्थिति में उन्होंने कहा कि आयोग को तथ्यों को सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है और जब उसके कामकाज पर सवाल उठते हैं तो पारदर्शिता बनाए रखना जनता के विश्वास के लिए जरूरी है।

चुनाव आयोग ने कथित मतभेदों पर क्या कहा?

चुनाव आयोग ने बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय और सुझावों को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। आयोग के अनुसार, किसी मुद्दे पर अलग राय, टिप्पणी या सुझाव सामने आना निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

आयोग ने कहा कि SIR सहित महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों की ओर से दिए गए सुझावों और टिप्पणियों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाना था।

आयोग ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में जिन आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, उन पर संबंधित दोनों चुनाव आयुक्तों ने सार्वजनिक रूप से स्वयं कोई बयान नहीं दिया है।

विपक्ष ने भी तेज किए सवाल

रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR पर रोक लगाने की मांग तेज कर दी है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।

अब NDA के तीन सहयोगी दलों की ओर से भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग किए जाने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। चुनाव आयोग इस पूरे विवाद पर आगे क्या विस्तृत जानकारी सामने रखता है, इस पर नजर बनी हुई है।

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