औरंगाबाद में डिजिटल अरेस्ट कर 63 वर्षीय बुजुर्ग से 9.90 लाख रुपये की ठगी, नौ दिन तक रखा डिजिटल नजरबंद

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
शहर में डिजिटल अरेस्ट के जरिए बुजुर्ग नागरिकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठगों का नेटवर्क लगातार खतरनाक होता जा रहा है। ताजा मामले में चिकलठाणा एमआईडीसी की एक कंपनी में पिछले 27 वर्षों से क्वालिटी इंचार्ज के पद पर कार्यरत 63 वर्षीय बुजुर्ग अधिकारी को साइबर ठगों ने लगातार नौ दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और परिवार को जेल भेजने की धमकी देकर आरोपियों ने उनसे 9 लाख 90 हजार रुपये ऐंठ लिए। इस मामले में रविवार (1 नवंबर) को पुंडलिकनगर पुलिस थाने में साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, गारखेड़ा क्षेत्र में रहने वाले 63 वर्षीय पीड़ित अपनी पत्नी के साथ रहते हैं, जबकि उनकी बेटी दूसरे राज्य में नौकरी करती है। 22 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 9:32 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को नई दिल्ली के दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके मोबाइल नंबर से मुंबई में कई लोगों को धमकी भरे फोन किए गए हैं और मुंबई पुलिस में उनके खिलाफ 10 से 15 शिकायतें दर्ज हुई हैं।
बुजुर्ग ने जब इस तरह की किसी भी गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया, तो ठगों ने उनके नाम पर फर्जी सिम कार्ड जारी होने की बात कही और ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के बहाने उन्हें व्हाट्सऐप कॉल पर आने के लिए मजबूर किया।
एफडी और म्यूचुअल फंड तोड़कर ठगों के खाते में भेजे 9.90 लाख रुपये
साइबर ठगों ने बुजुर्ग को बताया कि उनके सभी बैंक खातों में जमा रकम की वैधता साबित करने के लिए पैसे सुप्रीम कोर्ट के सत्यापन खाते में ट्रांसफर करने होंगे। कोर्ट से क्लियरेंस मिलने के बाद पूरी रकम 24 घंटे के भीतर वापस कर दी जाएगी।
इस झांसे और डर के कारण बुजुर्ग ने पोस्ट ऑफिस के बचत खाते में जमा रकम, फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और म्यूचुअल फंड तक तोड़ दिए। इसके बाद पूरी रकम बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी के खातों में जमा की।
30 अक्टूबर को आरोपियों के कहने पर उन्होंने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के श्रीकोना शाखा, असम स्थित खाते में आरटीजीएस के माध्यम से 9 लाख 90 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह खाता एस.के. जमशेद नाम के व्यक्ति के नाम पर बताया गया है।
रकम भेजने के बाद भी जब ठगों ने और पैसों की मांग शुरू कर दी, तब बुजुर्ग को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुंडलिकनगर पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। मामले की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक राजेंद्र मुंडे कर रहे हैं।
वीडियो कॉल पर तिरंगा, पुलिस का झंडा और फर्जी ईडी का पत्र दिखाकर जीता भरोसा
ठगों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के दौरान ऐसा माहौल तैयार किया था, जिससे सामने वाला व्यक्ति खुद को वास्तविक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समझने लगे। वीडियो कॉल में अधिकारी के पीछे तिरंगा, पुलिस का नीला झंडा, सरकारी कार्यालय जैसा टेबल और कंप्यूटर दिखाई दे रहे थे।
इसके बाद आरोपियों ने बुजुर्ग को बताया कि चर्चित गोयल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनका नाम सामने आया है। उनके बैंक खातों का इस्तेमाल देशविरोधी गतिविधियों के लिए काले धन के लेन-देन में किया गया है। आरोपियों ने यह भी दावा किया कि अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
इतना ही नहीं, उन्हें धमकी दी गई कि पुलिस उनके घर पहुंचकर उनकी पत्नी और बेटी को गिरफ्तार कर लेगी तथा उनके सभी बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएंगे। इन धमकियों से बुजुर्ग बुरी तरह घबरा गए।
नौ दिनों तक डिजिटल नजरबंदी, परिवार को भी जानकारी देने से रोका
आरोपियों ने बुजुर्ग को डराने के बाद मदद करने का नाटक किया और कहा कि यदि वह उनके निर्देशों का पालन करेंगे, तभी इस मामले से बच सकते हैं। साथ ही उन्हें सख्त हिदायत दी गई कि घर में किसी को भी इस बारे में कुछ न बताएं।
22 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक लगातार नौ दिनों के दौरान ठग सुबह, दोपहर और शाम वीडियो कॉल करके उन पर नजर रखते रहे। इस दौरान आरोपियों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लेटरहेड पर आधिकारिक दिखने वाले फर्जी समन और पत्र भी भेजे, ताकि बुजुर्ग का भरोसा जीता जा सके और उन्हें मानसिक रूप से अपने नियंत्रण में रखा जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सक्रिय साइबर अपराधियों के बढ़ते खतरे को उजागर किया है।
