धार्मिक आज़ादी छीनी जा रही, दलित-पिछड़ा-मुस्लिम गठजोड़ ही समाधान: चंद्रशेखर आज़ाद

लखनऊ में आयोजित मुस्लिम संवाद कार्यक्रम में आजाद समाज पार्टी काशीराम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि देश में अल्पसंख्यकों की धार्मिक आजादी छीनी जा रही है और मुसलमानों को शूद्र बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कांवड़ यात्रा के लिए व्यापक इंतजाम करती है लेकिन ईद की नमाज के लिए मुसलमान अगर सड़क पर नमाज पढ़े तो उन पर कार्रवाई होती है।
चंद्रशेखर ने दलित, पिछड़े और मुसलमानों के सियासी गठजोड़ की जरूरत बताते हुए कहा कि यह सिर्फ संवाद नहीं बल्कि आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि जो सरकार के साथ नहीं है, उनके अधिकार छीने जा रहे हैं। यादव, लोधी, कुर्मी, साहू सभी वर्गों का शोषण हो रहा है। मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए उन्होंने पूछा कि धामपुर में मुसलमानों की दुकानें क्यों बंद कराई गईं जबकि वे मीट की नहीं बल्कि चाय और नाई की दुकानें थीं।
उन्होंने कानपुर और इटावा की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बदतर हो चुकी है, जहां पुलिसवाले ही व्यापारियों का अपहरण कर रंगदारी मांग रहे हैं और कथावाचक की चोटी काटकर मूत्र से शुद्ध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर संविधान की रक्षा नहीं कर सकते तो सत्ता छोड़ देनी चाहिए।
उन्होंने सपा पर भी निशाना साधा और कहा कि एक पार्टी ने 18 प्रतिशत की गारंटी दी थी लेकिन सत्ता में आने पर कुछ भी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम भाजपा को वोट दें तो भाजपा शीर्ष पर पहुंच जाएगी।
चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी के संविधान में संख्या के हिसाब से भागीदारी का प्रावधान है और उनकी सरकार बनने पर कोई भी मुस्लिम, दलित या पिछड़ा मुख्यमंत्री बन सकता है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि मुस्लिम संवाद के बाद अब दलित और पिछड़ा वर्ग के लिए सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के बाबर अशरफ ने कहा कि चुप रहना जुल्म का साथ देने जैसा है और यह लड़ाई इंसाफ बनाम जुल्म की है। पूर्व न्यायाधीश बीडी नकवी ने दलित, पिछड़े और मुसलमानों के एकजुट होकर सत्ता में आने की बात कही और पार्टी को एक लाख रुपये का योगदान दिया।
इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार चित्तौड़, महासचिव मोहम्मद आकिब, आरिफ खान समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।
