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दिल्ली दंगे 2020: कानून मंत्री कपिल मिश्रा पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश, कोर्ट ने मानी याचिकाकर्ता की दलीलें

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में कथित भूमिका को लेकर दिल्ली सरकार में कानून मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने यमुना विहार निवासी मोहम्मद इलियास की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

मामले का पृष्ठभूमि
मोहम्मद इलियास ने दिसंबर 2024 में दायर याचिका में दावा किया था कि उन्होंने 23 फरवरी 2020 को मौजपुर-कर्दमपुरी क्षेत्र में कपिल मिश्रा और अन्य को सड़क जाम करते, दुकानों व रेहड़ियों को नष्ट करते और सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को धमकाते देखा था। इलियास ने तत्कालीन डीसीपी (उत्तर-पूर्व), दयालपुर थाने के एसएचओ, और पूर्व भाजपा विधायक जगदीश प्रधान सहित छह अन्य पर भी दंगों में संलिप्तता का आरोप लगाया।

अदालत ने माना—मिश्रा की उपस्थिति और भूमिका ‘पुष्ट’
लाइव लॉ के अनुसार, अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और बयानों के आधार पर कहा कि मिश्रा की उस क्षेत्र में उपस्थिति और उनके व्यवहार की पुष्टि होती है, और प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

दिल्ली पुलिस ने किया विरोध
दिल्ली पुलिस ने मार्च 2025 में दलील दी थी कि मिश्रा की भूमिका की पहले ही जांच हो चुकी है और कोई गंभीर आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। फिर भी, अदालत ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच का निर्देश दिया।

मिश्रा का वीडियो बयान और उसका असर
मालूम हो कि दंगे से एक दिन पहले 23 फरवरी 2020 को कपिल मिश्रा का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे मौजपुर ट्रैफिक सिग्नल पर भीड़ को संबोधित करते हुए पुलिस के सामने प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की चेतावनी दे रहे थे। उन्होंने कहा था,

“अगर ट्रंप के भारत में रहते हुए सड़कें खाली नहीं हुईं तो हम आपकी (पुलिस) भी नहीं सुनेंगे।”

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट ने भी ठहराया जिम्मेदार
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की 10 सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में भी हिंसा को “सुनियोजित और लक्षित” बताते हुए मिश्रा के भाषण को इसकी “ट्रिगरिंग पॉइंट” कहा गया था।

राजनीतिक हलचल तेज, विपक्ष हमलावर
एफआईआर के आदेश से दिल्ली की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने कपिल मिश्रा को बर्खास्त करने की मांग की है। वहीं, भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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