मुंबई के दहिसर में शेख और गुप्ता परिवारों के बीच खूनी संघर्ष, तीन की मौत, चार गंभीर घायल — क्या यह नफरत फैलाने वाली राजनीति और मीडिया का असर है?

मुंबई: दहिसर पश्चिम के गणपत पाटिल नगर इलाके में रविवार शाम दो परिवारों के बीच पुरानी दुश्मनी के चलते हुए खूनी संघर्ष में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना शाम करीब साढ़े चार बजे हुई, जब शेख और गुप्ता परिवारों के बीच कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 से इन दोनों परिवारों के बीच विवाद चला आ रहा था और तब दोनों पक्षों पर क्रॉस केस भी दर्ज किए गए थे। रविवार को यह विवाद उस समय फिर से भड़क उठा, जब अरमान शेख शराब के नशे में गली नंबर 14 में राम नवल गुप्ता की नारियल की दुकान पर पहुंचा।
यहां दोनों के बीच बहस शुरू हुई जो देखते ही देखते परिवारों के अन्य लोगों की भागीदारी के साथ धारदार हथियारों से हुए हमले में बदल गई।
घटना में राम नवल गुप्ता, अरविंद गुप्ता और हामिद शेख की मौत हो गई। वहीं अमर गुप्ता, अमित गुप्ता, अरमान शेख और हसन शेख गंभीर रूप से घायल हैं।
पुलिस उपायुक्त आनंद भोईटे ने बताया कि मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए शताब्दी अस्पताल भेजा गया है। दोनों पक्षों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल आरोपी अस्पताल में भर्ती हैं, इसलिए गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
क्या यह केवल एक आपसी विवाद है या समाज में फैलाए जा रहे धार्मिक ज़हर का नतीजा?
यह सवाल अब उठने लगा है कि क्या यह हिंसक टकराव सिर्फ व्यक्तिगत दुश्मनी तक सीमित है या फिर यह उस सांप्रदायिक नफरत का प्रत्यक्ष परिणाम है जिसे सत्ता में बैठे कुछ नेता और मुख्यधारा के मीडिया ने लगातार बढ़ावा दिया है?
बीते कुछ वर्षों में जिस तरह से टीवी डिबेट्स, सोशल मीडिया और राजनीतिक भाषणों में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण को तेज किया गया है, वह समाज के निचले स्तर तक असर करता दिख रहा है। यह मामला भले ही एक स्थानीय विवाद के रूप में शुरू हुआ हो, लेकिन उसमें शामिल पक्षों की पहचान को लेकर जनता में भ्रम और अफवाहें फैलने की आशंका बनी हुई है, जो स्थिति को और बिगाड़ सकती है।
इसलिए अब वक्त आ गया है कि नफरत की राजनीति और समाज को बांटने वाली पत्रकारिता पर सवाल उठाए जाएं — ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और सौहार्द बना रह सके।
