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यूपी में अवैध मदरसों और ईदगाह पर बुलडोज़र, उठे सवाल—क्या कार्रवाई सिर्फ मुस्लिम इदारों तक सीमित है?

श्रावस्ती/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती ज़िले में प्रशासन द्वारा अवैध मदरसों और ईदगाह पर की गई बुलडोज़र कार्रवाई ने एक बार फिर राजनीति और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर बहस छेड़ दी है। ज़िले में रविवार को प्रशासन ने पांच मदरसों और एक ईदगाह को ध्वस्त कर दिया। इन सभी संस्थानों पर आरोप था कि वे सरकारी भूमि—बंजर, खलिहान और परती ज़मीन—पर अवैध रूप से बने थे। अब तक जिले में 75 से अधिक मदरसों को सील किया जा चुका है।

प्रशासन का कहना है कि इन इदारों को पहले नोटिस देकर ज़मीन खाली करने को कहा गया था, लेकिन पालन न करने पर यह कार्रवाई की गई। इकौना, जमुनहा और भिनगा तहसीलों में की गई इस ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस और भारी फोर्स मौजूद रही।

हालांकि इस कार्रवाई ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं—क्या यह सिर्फ अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई है, या फिर किसी खास समुदाय को निशाना बनाने की सियासी रणनीति?
कई सामाजिक संगठनों और अल्पसंख्यक नेताओं ने इस कदम को “एकतरफा” बताया है। उनका आरोप है कि अवैध कब्जों के नाम पर केवल मुस्लिम धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों को चुनकर कार्रवाई की जा रही है, जबकि राज्य में कई मंदिर, मठ और अन्य धार्मिक संरचनाएं भी सरकारी ज़मीन पर बनी हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई बुलडोज़र नहीं चलता।

बीजेपी सरकार की मंशा पर सवाल

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि बार-बार मुस्लिम धार्मिक संस्थानों को “अवैध” बताकर कार्रवाई करना न सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देता है, बल्कि एक खास समुदाय में भय का माहौल भी बनाता है। विरोध करने वालों का कहना है कि यदि सचमुच यह कार्रवाई “अवैध कब्जों” के खिलाफ है, तो सरकार को सबके लिए एक समान मापदंड अपनाना चाहिए—चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा।

प्रशासन की सफाई

प्रशासन का कहना है कि सभी संस्थानों की जांच राजस्व टीम ने की है और जिन संस्थानों के पास वैध कागज़ात नहीं थे या जो सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे, उन्हीं पर कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यह धर्म के आधार पर नहीं, ज़मीन के स्वामित्व के आधार पर की गई कार्रवाई है।

मुद्दा केवल अवैध कब्जा या कुछ और?

मदरसों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की नीति पहले से ही कठोर रही है। हालिया समय में यूपी सरकार ने बिना मान्यता वाले मदरसों की जांच शुरू की थी। लेकिन यह सवाल बना हुआ है—क्या कार्रवाई की दिशा व लक्ष्य निष्पक्ष हैं?

इस पूरे मामले पर अभी तक किसी बड़े मुस्लिम संगठन या विपक्षी पार्टी की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हलचल तेज़ है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीति में बड़ा रंग ले सकता है।

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