आदिवासी महिला से गैंगरेप के बाद वीभत्स हत्या, ‘आदिवासी निर्भया’ मामले से दहला मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक 45 वर्षीय आदिवासी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद क्रूरता से उसकी हत्या कर दी गई। यह घटना शुक्रवार रात रोशनी पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत हुई, जो जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर है।
आंतें बाहर आईं, अत्यधिक रक्तस्राव से मौत
पुलिस के अनुसार, दो आरोपियों हरि (40) और सुनील (35) को गिरफ्तार कर लिया गया है। हरि ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसने यौन उत्पीड़न के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट में हाथ डाल दिया, जिससे उसकी आंतें बाहर आ गईं और अत्यधिक खून बहने से महिला की मौत हो गई। आरोपी ने आंतें वापस डालने की कोशिश भी की, लेकिन असफल रहा।
घटनास्थल पर नहीं मिला कोई रॉड
खरगोन रेंज के आईजी सिद्धार्थ बहुगुणा और जांच अधिकारी, कलवा थाने के प्रभारी निरीक्षक जगदीश सिंधिया ने स्पष्ट किया कि घटनास्थल से किसी भी प्रकार का लोहे या लकड़ी का रॉड बरामद नहीं हुआ। महिला की मौत केवल अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई।
सबूत जुटाने में जुटी पुलिस
पुलिस घटनास्थल से खून से सना ‘बेड रोल’ बरामद करने की कोशिश कर रही है और दोनों आरोपियों की रिमांड की प्रक्रिया चल रही है। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 66 (मौत का कारण बनना), 70 (1) (सामूहिक बलात्कार) और 103 (1) (हत्या की सजा) के तहत केस दर्ज किया गया है।
‘आदिवासी निर्भया’ से तुलना, कांग्रेस का हमला
इस वीभत्स घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने इसे ‘आदिवासी निर्भया’ करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा, “इंसानियत को शर्मसार करने वाली खंडवा की घटना पर सरकार खामोश क्यों है?”
सामूहिक आक्रोश और न्याय की मांग
यह मामला अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। जनआक्रोश और विपक्ष की मांगों के बीच पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग जोर पकड़ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे राज्य में इस घटना की निंदा हो रही है और सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था अभी भी कितनी असहाय है — खासकर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में।
