बैंक के दबाव में टूटे मैनेजर ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा – “कर्मचारियों पर दबाव न डालें”

पुणे से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां बैंक ऑफ बड़ौदा के एक वरिष्ठ शाखा प्रबंधक ने दफ्तर में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान 52 वर्षीय शिवशंकर मित्रा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के निवासी थे और महाराष्ट्र के बारामती स्थित भिगवण रोड शाखा में कार्यरत थे।
घटना की जानकारी और प्रारंभिक जांच
घटना गुरुवार रात की है, जब मित्रा ने ब्रांच कार्यालय में अपने कक्ष में आत्महत्या कर ली। शुक्रवार सुबह कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को इस बात का पता चला, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आत्महत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सुसाइड नोट से हुआ खुलासा
पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें मित्रा ने लिखा है,
“मैं अत्यधिक काम के दबाव की वजह से यह कदम उठा रहा हूं। मेरी बैंक से विनती है कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए। सभी कर्मचारी पूरी ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।”
मित्रा ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और उनके परिवार का इसमें कोई दोष नहीं है। उन्होंने अपनी पत्नी प्रिया और बेटी माही से माफी भी मांगी और अपनी आंखें दान करने की इच्छा जताई।
VRS मांगा था, नहीं मिली प्रतिक्रिया
जानकारी के अनुसार, आत्महत्या से पांच दिन पहले शिवशंकर मित्रा ने बैंक को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए पत्र लिखा था। उन्होंने उसमें मानसिक दबाव और काम के बोझ का उल्लेख किया था, लेकिन बैंक की ओर से कोई उत्तर नहीं मिलने के कारण वे पूरी तरह से टूट चुके थे।
बैंकिंग सेक्टर में काम के तनाव पर गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर से बैंकिंग क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों की मानसिक स्थिति और बढ़ते वर्कलोड को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कर्मचारियों की मानसिक स्थिति की अनदेखी कहीं भविष्य में और भी ऐसे हादसों को जन्म दे सकती है?
फिलहाल पुणे पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। वहीं, इस घटना से बैंक कर्मचारियों में दुख और आक्रोश की लहर है। अब देखना होगा कि बैंक प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कदम उठाता है।
