लव जिहाद का कोई अस्तित्व नहीं, केवल मुसलमानों को परेशान करने की रणनीति – अबू आज़मी

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आजमी ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा लव जिहाद के खिलाफ समिति गठित करने पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि देश संविधान और कानून से चलता है और शादी के संबंध में पहले से ही कानून बने हुए हैं।
आजमी ने कहा कि संविधान के अनुसार, 18 साल की उम्र के बाद कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से किसी भी धर्म में शादी कर सकता है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या अब सरकार संविधान में संशोधन करने जा रही है?
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी मर्जी से धर्म चुनने का अधिकार है। “जन्म के समय माता-पिता का धर्म अपनाया जाता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म को अपनाना चाहे, तो वह ऐसा कर सकता है।”
लव जिहाद को बताया काल्पनिक मुद्दा
अबू आजमी ने कहा कि लव जिहाद जैसी कोई चीज अस्तित्व में नहीं है। “यह मानसिकता और पागलपन का नतीजा है। अगर किसी हिंदू लड़की ने मुस्लिम से शादी कर ली, तो उसके परिवार पर दबाव डालकर उसे झूठे केस में फंसाया जाता है। यह सब मुसलमानों को परेशान करने की रणनीति है।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमरावती जैसे कई मामलों में देखा गया है कि लड़की को धमकाकर बयान बदलवाए जाते हैं। उन्होंने कहा, “हिंदू-मुस्लिम शादियां कोई नई बात नहीं हैं। जमाने से ऐसा होता आ रहा है।”
शादी और धर्म परिवर्तन पर किया स्पष्ट बयान
अबू आजमी ने कहा कि इस्लाम में किसी को डरा-धमकाकर धर्म परिवर्तन कराने का सवाल ही नहीं उठता। “अगर कोई हिंदू लड़की मुस्लिम से शादी करना चाहती है, तो इस्लाम के नियमों के अनुसार धर्म परिवर्तन के बिना ऐसा नहीं हो सकता।”
आजमी ने अंत में कहा कि सरकार को धर्म और शादी के मामलों में पहले से बने कानूनों का सम्मान करना चाहिए और नए कानूनों के नाम पर संविधान में हस्तक्षेप से बचना चाहिए।
