मराठवाड़ा में बारिश की भारी कमी, कई जिलों में फसल संकट गहराया, खरीफ फसलें संकट में

मराठवाड़ा के आठों जिलों में इस वर्ष मानसून की बारिश औसत से 40% तक कम दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। जुलाई मध्य तक कई जिलों में सामान्य से आधे से भी कम वर्षा हुई है, जिससे खासतौर पर खरीफ फसलें संकट में हैं।
जिलेवार स्थिति –
- औरंगाबाद: अब तक सामान्य से 31% कम बारिश हुई है। बीते दो दिन हल्की बारिश हुई, जिससे थोड़ी राहत मिली है लेकिन खेतों में नमी अभी भी नाकाफी है।
- जालना: लगभग 50% तक बारिश की कमी, जिससे कपास व सोयाबीन की फसलें प्रभावित हैं। किसान दोबारा बुआई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।
- बीड: लगातार सूखे के कारण खेतों में दरारें पड़ गई हैं। हल्की बारिश हुई लेकिन फसलों को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं।
- लातूर: 51% वर्षा की कमी दर्ज की गई है। पानी की टंकियों पर भी दबाव बढ़ा है। मूंग व उड़द की फसलें बर्बादी की कगार पर हैं।
- परभणी: बारिश की 54% तक कमी से तुअर व सोयाबीन की बुआई रुकी हुई है। कुछ किसानों ने बुआई स्थगित कर दी है।
- हिंगोली व नांदेड: अनियमित बारिश के कारण किसान तय नहीं कर पा रहे कि कौनसी फसल लगाई जाए। कीट व बीमारियों का भी खतरा बढ़ रहा है।
- उस्मानाबाद: लंबे इंतजार के बाद हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन मुख्य सिंचाई स्रोतों में पानी नहीं बढ़ पाया।
जयकवाड़ी से राहत की उम्मीद:
जयकवाड़ी डैम से जल स्तर कम होने के बावजूद प्रशासन ने दोनों मुख्य नहरों में सीमित मात्रा में पानी छोड़ा है, ताकि औरंगाबाद, बीड, जालना और परभणी के कुछ हिस्सों में फसलों को आंशिक राहत मिल सके।
फसलों पर असर:
मक्का, तुअर, सोयाबीन व कपास की फसलें पर्याप्त नमी न होने के कारण विकास नहीं कर पा रही हैं। कुछ स्थानों पर तो बीज अंकुरण भी नहीं हुआ है। किसानों ने बारिश की उम्मीद में दोबारा बुआई भी नहीं की।
पूर्वानुमान और प्रशासन की भूमिका:
हवामान विभाग के अनुसार आगामी दो दिनों तक कुछ स्थानों पर हल्की बारिश संभव है, लेकिन इसके बाद फिर से सूखा पड़ सकता है। प्रशासन से किसानों ने मांग की है कि फसल बीमा की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में विशेष सहायता दी जाए।
मराठवाड़ा का किसान फिलहाल संकट के दौर से गुजर रहा है, और यदि आगामी कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो यह संकट और भी गहरा सकता है।
