18 महीने बाद जिंदा लौटी युवती, जिसके रेप और मर्डर केस में 3 आरोपी काट रहे थे जेल
झाबुआ में 18 महीने पहले मृत घोषित की गई युवती जीवित लौट आई, पुलिस और परिजन हैरान — हत्या के आरोपी को हाईकोर्ट से मिली जमानत

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ पुलिस और प्रशासन को उलझन में डाल दिया है बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। साल 2023 में एक युवती के अपहरण और हत्या का मामला दर्ज हुआ था, उसका शव भी बरामद हुआ और अंतिम संस्कार तक कर दिया गया था। लेकिन अब, 18 महीने बाद वही युवती जीवित लौट आई है।
युवती के लौटने से मचा हड़कंप
इस युवती की अचानक वापसी ने न केवल परिजनों को चौंका दिया, बल्कि पुलिस भी सकते में आ गई है। युवती के जीवित लौटने के साथ ही केस में तीन बड़े सवाल उठ खड़े हुए हैं:
- इतने दिनों तक यह युवती कहां थी?
- वह कौन थी जिसका अंतिम संस्कार इस युवती के नाम पर किया गया?
- परिजनों ने शव की पहचान गलत कैसे कर ली?
इन सवालों के जवाब खोजने के लिए पुलिस ने इस मामले की नई सिरे से जांच शुरू कर दी है।
प्रेम संबंध, अपहरण और बंधक बनाकर रखा
युवती ने पुलिस को बताया कि उसका एक युवक से प्रेम संबंध था और अगस्त 2023 में वह घरवालों को बिना बताए उसके साथ चली गई थी। प्रेमी ने उसे कोटा में एक साल तक बंधक बनाकर रखा और इस दौरान उसके साथ दुष्कर्म भी किया। युवती ने बताया कि उसके प्रेमी ने उसे किसी और को पाँच लाख रुपये में बेच दिया, जहां से वह किसी तरह भागकर बच निकली और अपने घर लौटी।
मरने की खबर से थी अनजान
युवती का कहना है कि उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि उसके लौटने तक परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया है। उसने बताया कि उसे समझ नहीं आया कि उसके कपड़े उस शव के पास कैसे पहुंचे थे। इसीलिए जैसे ही वह घर पहुंची और पूरी कहानी जानी, उसने आधार कार्ड और वोटर आईडी लेकर पुलिस के सामने पेश होकर खुद के जीवित होने का सबूत दिया।
हाईकोर्ट से आरोपी को जमानत
इस केस में पहले पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिन पर बलात्कार और हत्या के आरोप लगाए गए थे। मामला अब अंतिम चरण में था और केवल एक गवाह की गवाही बाकी थी। मगर युवती के जीवित लौटने और नए तथ्यों के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक आरोपी को जमानत दे दी है और पुलिस को पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
सवालों के घेरे में जांच प्रणाली
इस प्रकरण ने पुलिस की शव की पहचान और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल एक गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किसी एक गलत पहचान की वजह से निर्दोष लोगों की जिंदगी किस तरह प्रभावित हो सकती है।
अब सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई और कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। क्या असली दोषियों को सज़ा मिलेगी या यह मामला भी जांच की भूलों में खो जाएगा?
