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महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव 2026: ग्रामीण राजनीति में बड़ा उलटफेर, भाजपा सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी

खासदार टाईम्स न्यूज़ नेटवर्क 

महाराष्ट्र में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की ग्रामीण राजनीति की तस्वीर साफ कर दी है। 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए हुए इन चुनावों में सत्ताधारी और विरोधी दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। नतीजों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी राज्यभर में सबसे अधिक सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

राज्यस्तरीय स्थिति

राज्यभर की जिला परिषदों में कुल मिलाकर

  • भाजपा के 225 सदस्य निर्वाचित हुए हैं।
  • अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस के 172 सदस्य चुने गए हैं।
  • एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के 162 सदस्य विजयी हुए हैं।
  • कांग्रेस को कुल 55 सीटों पर सफलता मिली है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना कई जिलों में सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाने की स्थिति में हैं।


धाराशिव (उस्मानाबाद) जिला परिषद

धाराशिव जिला परिषद में कुल 55 सीटों के लिए चुनाव हुए। परिणामों में भाजपा 18 सीटों के साथ सबसे आगे रही। शिवसेना (शिंदे गुट) को 15 सीटें मिलीं, जबकि शिवसेना (ठाकरे गुट) ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की। अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस को 6 सीटें, अपक्ष को 4, कांग्रेस को 3 और समाजवादी पार्टी को 1 सीट मिली।


लातूर जिला परिषद

लातूर जिला परिषद के 59 में से 59 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। यहां कांग्रेस 23 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। भाजपा ने 18 सीटें जीती हैं। अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं। शिवसेना और शिवसेना (यूबीटी) को एक-एक सीट, राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) को एक सीट, मनसे को एक और अपक्ष को दो सीटों पर जीत मिली है।


सांगली जिला परिषद

सांगली जिले में कई जगहों पर युवा उम्मीदवारों की जीत चर्चा में रही। आटपाडी तालुका के दिघंची जिला परिषद गट से 22 वर्षीय पृथ्वीराज तानाजी पाटील ने एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना से चुनाव जीतकर सबका ध्यान खींचा। उनके पिता तानाजी पाटील के सामाजिक कार्यों का लाभ उन्हें मिला, ऐसा स्थानीय राजनीतिक जानकारों का कहना है।


कोल्हापुर जिला परिषद

कोल्हापुर जिला परिषद में कुल 68 सीटें हैं। यहां राष्ट्रवादी कांग्रेस 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस को 15, भाजपा को 12 और शिवसेना (शिंदे गुट) को 9 सीटें मिली हैं। शिवसेना (ठाकरे गुट) को एक, जनसुराज्य को 6, स्वाभिमानी शेतकरी संघटना को एक और शाहू आघाड़ी (राजेंद्र पाटील यड्रावकर गुट) को 4 सीटें मिली हैं। राजनीतिक हलकों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि जिला परिषद अध्यक्ष पद राष्ट्रवादी कांग्रेस के पास जाएगा।


छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिला परिषद

छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद की सभी 63 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। यहां भाजपा ने 23 सीटें जीती हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) को 21 और शिवसेना (यूबीटी) को 9 सीटें मिली हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस को 4, शरद पवार गुट को एक, कांग्रेस को एक और अपक्ष को 4 सीटें मिली हैं।


सातारा जिला परिषद

सातारा जिला परिषद में कुल 65 सीटें हैं, लेकिन यहां किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। भाजपा को 23, राष्ट्रवादी को 22 और शिवसेना को 13 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को एक और अन्य को दो सीटें मिली हैं। इस कारण यहां त्रिशंकु स्थिति बनी हुई है और सत्ता गठन के लिए गठबंधन की भूमिका अहम होगी।


परभणी जिला परिषद

परभणी जिला परिषद में भाजपा ने 54 में से 24 सीटें जीतकर बढ़त बनाई है। बहुमत के लिए भाजपा को केवल चार सीटों की आवश्यकता है। पालकमंत्री मेघना बोर्डीकर के नेतृत्व में भाजपा ने शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ मिलकर सत्ता गठन का दावा किया है। अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस को यहां 16 सीटें मिली हैं।


परिवारवाद और युवा चेहरों की चर्चा

परभणी जिले में कई राजनीतिक नेताओं ने अपने परिवार के सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारा। कुछ जगहों पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा, तो कई नेताओं के परिवारों ने जीत दर्ज की। वहीं कई जिलों में 22 से 25 वर्ष के युवा उम्मीदवारों की जीत ने यह संकेत दिया है कि ग्रामीण राजनीति में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ रही है।


मनसे की मौजूदगी

इस चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी सीमित लेकिन प्रतीकात्मक सफलता हासिल की है। कुछ जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति में मनसे ने जीत दर्ज कर संगठन के लिए नया उत्साह पैदा किया है।


समग्र निष्कर्ष

जिला परिषद चुनाव 2026 के नतीजों से यह साफ हो गया है कि महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति में भाजपा सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। हालांकि कई जिलों में राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना की भूमिका निर्णायक बनी हुई है। कुछ जिलों में स्पष्ट बहुमत से स्थिर सत्ता की तस्वीर दिखी है, तो कई जगहों पर गठबंधन और समझौतों के जरिए सत्ता गठन की संभावना बन रही है। आने वाले दिनों में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां और तेज होने की उम्मीद है।

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