सिल्लोड-सोयगाव की राजनीति के “किंग मेकर” अब्दुल सत्तार — नाम, काम और जनविश्वास की ताकत

खासदार टाईम्स न्यूज़ नेटवर्क
महाराष्ट्र के औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) जिले के सिल्लोड-सोयगाव विधानसभा क्षेत्र में यदि किसी एक नेता का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है, तो वह हैं Abdul Sattar। वर्षों के राजनीतिक अनुभव, बेबाक नेतृत्व शैली और जमीनी पकड़ के दम पर उन्होंने अपनी ऐसी पहचान बनाई है कि उन्हें क्षेत्र का “किंग मेकर” कहा जाता है।
राजनीतिक सफर: संघर्ष से शिखर तक
अब्दुल सत्तार का राजनीतिक सफर साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर राज्य की मुख्यधारा की राजनीति तक पहुंचा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क और संगठन के माध्यम से अपनी मजबूत पकड़ बनाई। लगातार जनता के बीच सक्रिय रहकर उन्होंने विधानसभा तक का सफर तय किया और मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली।
उनका राजनीतिक जीवन केवल पदों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने क्षेत्रीय विकास, किसानों की समस्याओं, सिंचाई, सड़क निर्माण, शैक्षणिक सुविधाओं और स्थानीय बुनियादी ढांचे के लिए लगातार आवाज उठाई। यही कारण है कि चुनाव दर चुनाव उन्होंने अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार कायम रखा।
नाम और काम से पहचान
अब्दुल सत्तार की सबसे बड़ी ताकत यह मानी जाती है कि उन्होंने अपनी पहचान किसी एक राजनीतिक दल या संगठन के सहारे नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत प्रभाव और कार्यशैली से बनाई। सिल्लोड-सोयगाव में उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ और चुनावी परिणाम यह दर्शाते हैं कि जनता का भरोसा सीधे उनके व्यक्तित्व पर है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, क्षेत्र में यदि कोई उम्मीदवार उनका समर्थन प्राप्त कर ले, तो उसकी जीत की संभावना काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि उन्हें “किंग मेकर” की उपाधि दी जाती है।
बेटों की ऐतिहासिक जीत: प्रभाव की नई मिसाल
हाल ही में हुए नगर परिषद तथा जिला परिषद/पंचायत समिति चुनावों में अब्दुल सत्तार के दोनों बेटों ने भारी मतों से जीत दर्ज की।
नगर परिषद में उनके बेटे की शानदार विजय ने स्थानीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ा, वहीं जिला परिषद/पंचायत समिति चुनाव में भी परिवार की प्रभावशाली जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि सत्तार परिवार का जनाधार केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में भी उनकी मजबूत पकड़ है।
इन चुनाव परिणामों ने यह साबित किया कि अब्दुल सत्तार का राजनीतिक प्रभाव पीढ़ी दर पीढ़ी मजबूत हो रहा है। यह जीत केवल पारिवारिक सफलता नहीं, बल्कि उस जनविश्वास की मुहर है जो वर्षों की सेवा और संपर्क से अर्जित हुआ है।
क्यों कहा जाता है “किंग मेकर”?
सिल्लोड-सोयगाव की राजनीति में अब्दुल सत्तार की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।
- उनके समर्थन से उम्मीदवारों को नई ऊर्जा मिलती है।
- स्थानीय समीकरणों को साधने में उनकी रणनीति प्रभावी मानी जाती है।
- जनता के साथ उनका सीधा संवाद उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देता है।
उन्होंने यह सिद्ध किया है कि मजबूत जनाधार और निरंतर क्षेत्रीय विकास के कार्य ही असली राजनीतिक पूंजी होते हैं।
निष्कर्ष
अब्दुल सत्तार आज केवल एक विधायक या पूर्व राज्यमंत्री नहीं, बल्कि सिल्लोड-सोयगाव की राजनीति के केंद्रीय स्तंभ हैं। उनका नाम ही उनकी पहचान है और उनका काम ही उनकी ताकत।
हालिया चुनावों में उनके बेटों की जीत ने यह संदेश और स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र की राजनीति में उनका प्रभाव अडिग है। जनता का भरोसा, वर्षों का अनुभव और जमीनी पकड़ — यही तीन स्तंभ उन्हें सच्चे अर्थों में “किंग मेकर” बनाते हैं।
