खान एजाज़ अहमद: लोकसभा चुनाव 2019 में 23 में से 5 वें स्थान पर, अब 2029 में बहुमत की ओर!

औरंगाबाद: खान एजाज़ अहमद सिर्फ एक शख्सियत नहीं, बल्कि एक आंदोलन हैं — एक ऐसी क्रांति जो मौजूदा राजनीति की खोखली परंपराओं को तोड़कर सच्चे लोकतंत्र की ओर बढ़ रही है। वे न ही किसी बड़े दल की छाया में, न ही सत्ता की चकाचौंध में — बल्कि जनता के बीच से उठकर, उनके दर्द और सपनों को लेकर सामने आए हैं।
“मुझे देश और जनता की सेवा करनी है, न कि कुर्सी का सौदा”
खान एजाज़ अहमद का स्पष्ट संदेश है कि उन्हें सांसद बनने के लिए न पार्टियों की छत्रछाया चाहिए, न तामझाम और न ही करोड़ों का प्रचार खर्च। उनका उद्देश्य साफ है — जनसेवा को ही राजनीति की असली ताक़त बनाना। वे कहते हैं, “मैं चुनाव इसलिए लड़ता हूं ताकि व्यवस्था को भीतर से बदल सकूं, और जनता को उसका असली हक़ दिला सकूं।”
औरंगाबाद में मजबूत सामाजिक छवि और जनाधार
पिछले कई वर्षों से खान एजाज़ अहमद औरंगाबाद शहर और जिले में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने स्थानीय मुद्दों को लेकर कई बार प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया, धरना-प्रदर्शन से लेकर ज्ञापन और जनआंदोलनों के ज़रिए जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाया।
2019 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 5वां स्थान — जनसमर्थन का प्रमाण
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जब खान एजाज़ अहमद ने औरंगाबाद से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, तब 23 प्रत्याशियों में से 5वां स्थान हासिल करना, उनकी लोकप्रियता और जनता के विश्वास का प्रमाण था। अब वे 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर पूरी ताकत से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
2029 के लिए नई रणनीति, युवा और ईमानदार टीम के साथ मिशन मोड में
खान एजाज़ अहमद अब 2029 के लोकसभा चुनाव को सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन के रूप में देख रहे हैं। वे सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, शिक्षकों और पीड़ित वर्गों से संवाद कर रहे हैं। उनका संदेश है — “अगर आप बदलाव चाहते हैं, तो बदलाव लाने वाले को चुनिए, पहचानिए।”
जनता से अपील — अब समय है संकल्प को समर्थन देने का
खान एजाज़ अहमद कहते हैं, “अगर आप मेरी सोच से सहमत हैं, तो यह केवल मेरी लड़ाई नहीं, आपकी भी है। जो व्यक्ति या उम्मीदवार मेरी संकल्पना पर खरा उतरे, उसे बेझिझक समर्थन दें।” उनका यह आह्वान न सिर्फ औरंगाबाद, बल्कि देशभर में सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या अब राजनीति को जनप्रतिनिधियों से नहीं, जनसेवकों से भरने का समय आ गया है?
निष्कर्ष:
2029 में खान एजाज़ अहमद की वापसी केवल एक उम्मीद नहीं, बल्कि लोकतंत्र की शुद्धिकरण की एक चेतावनी है — कि अब राजनीति ईमानदार, निडर और सेवा-भाव रखने वालों के हाथों में दी जानी चाहिए।
