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औरंगाबाद में साप्ताहिक बाजार बंद करने के फैसले पर घमासान, सभी दलों का विरोध; अब आधुनिकीकरण की राह

औरंगाबाद/प्रतिनिधि

औरंगाबाद नगर निगम में शनिवार को बजट चर्चा के लिए बुलाई गई स्थायी समिति की बैठक में साप्ताहिक बाजार बंद करने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। इस प्रस्ताव का न केवल विपक्ष, बल्कि सत्ताधारी नगरसेवकों ने भी कड़ा विरोध किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि बाजार बंद करने के बजाय उनका आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए।

बैठक में सभापति अनिल मकरिये, सचिव एन. भोंबे, भाजपा, एमआईएम और दोनों शिवसेना के प्रतिनिधियों के साथ अतिरिक्त आयुक्त रणजीत पाटील और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक की शुरुआत में सदस्य राज वानखेडे ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अगर साप्ताहिक बाजार बंद किए जाते हैं तो प्रशासन के पास वैकल्पिक व्यवस्था क्या है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ‘लोकल टू वोकल’ का नारा दे रही हैं, ऐसे में साप्ताहिक बाजार किसानों को सीधे ग्राहकों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

नगरसेवकों ने मांग की कि बाजारों में पार्किंग, शुद्ध पेयजल, शेड, प्लेटफॉर्म (ओटे) जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि प्रशासन को होने वाली समस्याएं दूर हों और नागरिकों को भी सुविधा मिल सके।

महिला नगरसेवक माधुरी अदवंत ने भी प्रशासन के फैसले पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि शहर के साप्ताहिक बाजारों की अपनी ऐतिहासिक पहचान है। केवल ट्रैफिक समस्या के कारण इन्हें बंद करना उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन बाजारों को मॉल की तर्ज पर विकसित किया जाए, जिससे व्यवस्था भी सुधरे और व्यापार भी प्रभावित न हो।

इसके अलावा सदस्य सचिन खैरे, एमआईएम के मतीन पटेल और अन्य नगरसेवकों ने भी बाजार बंद करने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे जनहित के खिलाफ बताया। बैठक में जाफर गेट, चिकलठाणा और पीर बाजार को शहर के प्रमुख साप्ताहिक बाजार के रूप में उल्लेख किया गया।

वहीं, इस पूरे मुद्दे पर प्रशासन की ओर से अतिरिक्त आयुक्त रणजीत पाटील ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए पहले बाजार बंद करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि अब स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इन बाजारों में सुधार कर समस्याएं दूर करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल साप्ताहिक बाजार बंद करने का फैसला स्थगित कर दिया गया है और अब इन बाजारों को बेहतर सुविधाओं के साथ व्यवस्थित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

इस बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि औरंगाबाद में साप्ताहिक बाजार बंद नहीं होंगे, बल्कि उन्हें आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में काम किया जाएगा।

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