बार-बार कथित मारपीट, फर्जी नियुक्ति पत्र और आर्थिक धोखाधड़ी के आरोपों पर कार्रवाई की मांग; सत्यजीत करनाडे का आमरण अनशन सातवें दिन भी जारी

जालना | कादरी हुसैन
जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष विभिन्न मामलों में कार्रवाई की मांग को लेकर सत्यजीत सूर्यकांत करनाडे का आमरण अनशन रविवार को सातवें दिन भी जारी रहा। करनाडे ने आरोप लगाया है कि स्वयं तथा उनके 12 वर्षीय नाबालिग पुत्र के साथ बार-बार कथित मारपीट, सीएल-3/20 लाइसेंस से जुड़े कथित फर्जी नियुक्ति पत्र के माध्यम से आर्थिक अनियमितता तथा अनेक शासकीय कार्यालयों में शिकायतें देने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
करनाडे के अनुसार, 13 फरवरी 2024 को सुशील करनाडे ने कथित रूप से लकड़ी के बैट से उन पर हमला किया, जिससे उनके सिर, नाक और मुंह से रक्तस्राव हुआ। घटना के बाद जिला शासकीय अस्पताल में उनका सीटी स्कैन कराया गया। उनका कहना है कि इस मामले से संबंधित चिकित्सीय दस्तावेज और शिकायतें संबंधित अधिकारियों को सौंपने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 4 दिसंबर 2025 को, जब वे अस्वस्थ थे, तब सुशील करनाडे ने कथित रूप से उन पर और उनके 12 वर्षीय पुत्र पर पीवीसी पाइप से हमला किया। करनाडे का दावा है कि इस घटना की मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट तैयार की गई थी तथा सभी साक्ष्य संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं।
करनाडे के मुताबिक, 8 जुलाई 2026 को उन पर और उनके पुत्र पर एक बार फिर कथित मारपीट की गई। उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद 112 आपातकालीन सेवा पर कॉल कर सदर बाजार पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुशील करनाडे, अनिकेत जायसवाल और विनोद जायसवाल ने कथित रूप से आपसी मिलीभगत से सीएल-3/20 लाइसेंस से संबंधित फर्जी नियुक्ति पत्र का उपयोग कर सीएल-2 होलसेल कारोबारियों से लगभग 9.50 लाख रुपये का माल उधार प्राप्त किया। उनका कहना है कि इस संबंध में सभी आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य संबंधित विभागों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं, लेकिन जांच अब तक पूरी नहीं हुई है।
करनाडे ने बताया कि सीएल-2 होलसेलरों की लगभग 9.50 लाख रुपये की कथित देनदारी तथा उनके स्वयं के 7.65 लाख रुपये के बकाया भुगतान को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, कदीम जालना पुलिस थाना, सदर बाजार पुलिस थाना और राज्य उत्पादन शुल्क विभाग सहित विभिन्न स्तरों पर कई बार लिखित शिकायतें की गई हैं। उनका दावा है कि सीएमओ और डीजीपी कार्यालय से संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन अब तक मामले में कोई प्रभावी जांच या कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि वे क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी), डायबिटिक न्यूरोपैथी और फुट ड्रॉप जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। उनके अनुसार, आमरण अनशन शुरू होने के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ रही है और चिकित्सकों ने समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई है।
करनाडे का आरोप है कि जिला पुलिस अधीक्षक ने उपचार के लिए आवश्यक 7.65 लाख रुपये की बकाया राशि दिलाने तथा पूरे प्रकरण की जांच कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन 20 जुलाई 2026 तक न तो उन्हें राशि प्राप्त हुई और न ही संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।
उन्होंने मांग की है कि सुशील करनाडे, अनिकेत जायसवाल और विनोद जायसवाल के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, उपचार के लिए आवश्यक 7.65 लाख रुपये की बकाया राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए तथा उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
करनाडे ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती और उपचार के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।
अस्वीकरण: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप सत्यजीत सूर्यकांत करनाडे द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और उनके दावों पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष समाचार प्रकाशित किए जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।