पॉक्सो मामले में विशेष न्यायालय का फैसला: नाबालिग से छेड़छाड़ के पारध निवासी आरोपी को 3 वर्ष का सश्रम कारावास, सह-आरोपी पर जुर्माना

जालना | कादरी हुसैन
माननीय विशेष जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जालना, श्री कृपेश मोरे ने पारध पुलिस स्टेशन में दर्ज पॉक्सो मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी शेख मोहसिन शेख वसीम (उम्र 31 वर्ष) को नाबालिग बालिका के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में 3 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹11,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं सह-आरोपी शेख रहीम शेख वसीम (उम्र 33 वर्ष) को पीड़िता के साथ मारपीट करने के आरोप में ₹1,000 का जुर्माना लगाया गया। दोनों आरोपी पारध बुजुर्ग, तहसील भोकरदन, जिला जालना के निवासी हैं।
घटना का विवरण
27 जून 2020 को स्कूल से लौटने के बाद रात करीब 10 बजे 15 वर्षीय पीड़िता अपने घर के बाड़े में फोन पर बात कर रही थी, तभी आरोपी मोहसिन वहां आया और उसे बाथरूम की ओर खींचकर अश्लील हरकत की। पीड़िता के विरोध और शिकायत की चेतावनी देने पर आरोपी वहां से भाग गया।
अगले दिन, 28 जून 2020 को पीड़िता ने यह बात आरोपी की पत्नी को बताई। इसी दौरान मोहसिन और उसका भाई रहीम वहां पहुंचे और पीड़िता को धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी, साथ ही उसके साथ मारपीट भी की।
पीड़िता ने उसी दिन पारध पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अपराध क्रमांक 173/2020 के तहत IPC की धारा 354, 323, 506, 34 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 व 12 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। जांच पुलिस उप-निरीक्षक पी. एस. उबाले ने पूरी की और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
साक्ष्य और सुनवाई
अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 6 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, जिनमें पीड़िता, उसकी मां, पंच साक्षी, स्कूल के प्रधानाध्यापक, चिकित्सीय परीक्षण करने वाले डॉक्टर और जांच अधिकारी शामिल थे। पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए स्कूल का ‘निर्गम उतारा’ (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) निर्णायक साक्ष्य साबित हुआ। मामले में विशेष लोक अभियोजक वर्षा लक्ष्मीकांत मुकीम ने सरकार पक्ष की पैरवी की।
अंतिम फैसला
न्यायालय ने आरोपी मोहसिन को पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 व 12 तथा IPC की धारा 323, 506 के तहत दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹11,000 जुर्माने (न भरने पर 6 माह अतिरिक्त कारावास) की सजा सुनाई। सह-आरोपी रहीम को IPC की धारा 323 सह 34 के तहत ₹1,000 जुर्माने (न भरने पर 1 माह अतिरिक्त कारावास) की सजा दी गई। न्यायालय ने आदेश दिया कि दोनों आरोपियों से वसूली गई कुल ₹12,000 की राशि पीड़िता को प्रदान की जाए।
इस मामले में सेशन कोर्ट पैरवी में तैनात पुलिस कर्मियों के सहयोग की भी सराहना की गई।