कोंकण ही नहीं, मराठवाड़ा-विदर्भ के आम किसानों को भी मिले ₹1 लाख प्रति हेक्टेयर राहत: संजय मोरे पाटील

जाफराबाद | शेख खालेद
एग्रोविजन समूह खेती संघ के संस्थापक प्रमुख एवं आम उत्पादक किसान संजय मोरे पाटील ने राज्य सरकार से मांग की है कि कोंकण क्षेत्र की तरह मराठवाड़ा, विदर्भ और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों के आम उत्पादक किसानों को भी समान रूप से राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार क्षेत्रीय भेदभाव समाप्त करते हुए सभी प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम ₹1 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करे।
संजय मोरे पाटील ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस वर्ष आम उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार ने बिना फल फसल बीमा वाले किसानों को सहायता देने की घोषणा तो की है, लेकिन यह राहत केवल कोंकण क्षेत्र तक सीमित रखी गई है। मराठवाड़ा, विदर्भ और अन्य क्षेत्रों के किसानों को इससे वंचित रखना अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मराठवाड़ा और विदर्भ में भी आम की खेती का क्षेत्र तेजी से बढ़ा है और अधिकांश बाग उत्पादन की अवस्था में हैं। इस वर्ष बागों में रिकॉर्ड स्तर पर मंजर आया था, जिससे किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन मौसम में अचानक बदलाव के कारण अधिकांश मंजर सूख गया। जो फल बने, वे भी समय से पहले झड़ गए, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
मोरे पाटील ने कहा कि आम की खेती अत्यंत जोखिमपूर्ण और खर्चीली है, जिसमें प्रति एकड़ एक लाख रुपये से अधिक की लागत आती है। ऐसे में सरकार को सभी प्रभावित आम उत्पादक किसानों के साथ समान व्यवहार करते हुए प्रति हेक्टेयर कम से कम ₹1 लाख की सहायता प्रदान करनी चाहिए, ताकि किसानों को हुए नुकसान की आंशिक भरपाई हो सके। उन्होंने राज्य सरकार से बिना किसी क्षेत्रीय भेदभाव के महाराष्ट्र के सभी प्रभावित आम उत्पादक किसानों को समान आर्थिक राहत देने की मांग की।
