16 वर्षीय किशोरी का पीछा कर परेशान करने वाले आरोपी को 3 साल की सजा, 15 हजार रुपये जुर्माना

जालना | कादरी हुसैन
16 वर्षीय किशोरी का पीछा करने, उसे परेशान करने और लज्जित करने वाली बातें कहने के मामले में जालना के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय क्रमांक-4 ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। विशेष जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृपेश विजय मोरे ने आरोपी वरद उर्फ पुरुषोत्तम साईराज नायडू (21), निवासी कानडी मोहल्ला, जालना को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को अतिरिक्त 3 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 351-अ, 354-ब, 341, 504 एवं 506 तथा बाल लैंगिक अपराध संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 8 एवं 12 के तहत दोषी पाया।
करीब छह महीने तक किशोरी का पीछा करने का आरोप
मामले के अनुसार, आरोपी पर शिकायत दर्ज होने से करीब छह माह पहले से 16 वर्षीय किशोरी का पीछा करने का आरोप था। वह कथित तौर पर किशोरी से उसका मोबाइल नंबर मांगता था। नंबर देने से इनकार करने पर उसे रास्ते में रोकने और वहां से नहीं जाने देने की धमकी देने का भी आरोप था। इस वजह से किशोरी भयभीत हो गई थी।
आरोपी पर यह भी आरोप था कि वह किशोरी को अश्लील फोन कॉल करता था। इतना ही नहीं, फोन पर बात नहीं करने पर उसकी पढ़ाई बंद करवाने की धमकी भी दी जाती थी। पढ़ाई प्रभावित होने के डर से किशोरी ने शुरुआत में इस बारे में अपने परिवार को जानकारी नहीं दी।
घर तक पीछा करने के बाद सामने आया मामला
19 नवंबर 2023 को दोपहर करीब 3 बजे किशोरी बाहर से अपने घर लौट रही थी। आरोप के मुताबिक, आरोपी उसका पीछा करते हुए उसके घर तक पहुंच गया और उसकी ओर देखकर इशारे करने लगा।
इस घटना के बाद किशोरी ने हिम्मत जुटाकर पूरी जानकारी अपने माता-पिता को दी। इसके बाद 22 नवंबर 2023 को किशोरी ने सदर बाजार पुलिस थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर अपराध क्रमांक 978/2023 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। जांच की जिम्मेदारी सहायक पुलिस निरीक्षक एस.एम. इंगलेवाड को सौंपी गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
पांच गवाहों की गवाही रही महत्वपूर्ण
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार पक्ष की ओर से कुल पांच गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें पीड़ित किशोरी, उसके पिता, पड़ोसी, घटनास्थल पंच और जांच अधिकारी की गवाही महत्वपूर्ण रही।
सरकार पक्ष ने न्यायालय के समक्ष मामले से जुड़े साक्ष्य और अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को संबंधित धाराओं के तहत दोषी करार दिया।
3 साल का सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माना
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय क्रमांक-4, जालना के विशेष जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृपेश विजय मोरे ने आरोपी वरद उर्फ पुरुषोत्तम साईराज नायडू को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर कुल 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त 3 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
इस मामले में सरकार की ओर से विशेष जिला सरकारी अभियोक्ता वर्षा लक्ष्मीकांत मुकीम ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की।
मामले की कार्रवाई में जालना के पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक और उपविभागीय पुलिस अधिकारी के मार्गदर्शन में सदर बाजार पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक संदीप भारती तथा सेशन कोर्ट पैरवी अमलदार ने महत्वपूर्ण सहयोग किया।
न्यायालय के इस फैसले को नाबालिग किशोरियों को परेशान करने और उनका पीछा करने जैसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।