औरंगाबाद सहित मराठवाड़ा की 7,107 जिला परिषद स्कूलों की कक्षाएं जर्जर, कहीं छत टपक रही तो कहीं खिड़कियां गायब

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
कहीं स्कूल की छत टपक रही है, तो कहीं खिड़कियां गायब हैं। कई स्कूलों की दीवारें जर्जर होकर गिरने की स्थिति में हैं। ऐसी हालत में मराठवाड़ा के जिला परिषद स्कूलों की 7,107 कक्षाएं हैं। इसके चलते इन कक्षाओं में विद्यार्थियों को बैठाना संभव नहीं है।
मराठवाड़ा की 222 जिला परिषद स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं हैं, जबकि 3,390 स्कूलों में बने शौचालयों का इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा है। मराठवाड़ा की कुल 12,565 स्कूलों में से 3,451 स्कूलों में बिजली कनेक्शन है, लेकिन बिजली के बिलों का भुगतान नहीं होने के कारण इनका उपयोग नहीं किया जा सकता। वहीं 2,149 स्कूलों में बिजली की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है।
‘क्रॉकोच जनता पार्टी’ के अध्यक्ष अभिजीत दिपके द्वारा स्कूलों का दौरा शुरू किए जाने के बाद स्कूलों की बदहाल स्थिति से जुड़े इन आंकड़ों की दोबारा जांच की जा रही है।
अभिजीत दिपके ने स्कूलों का दौरा शुरू करने के बाद राज्य के मुख्य सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई। गांव-गांव में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं तो उन्हें हल करने के लिए सरकारी तंत्र में क्या बदलाव किए जा सकते हैं, इस पर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच राज्य सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों की भी दोबारा जांच की जा रही है।
दूसरी ओर, स्कूली स्तर पर ग्राम शिक्षा समिति और ग्रामीणों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने वाले अभिजीत दिपके के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से मराठवाड़ा के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की गंभीर स्थिति सामने आ रही है।
बड़ी संख्या में नई कक्षाओं की जरूरत
मराठवाड़ा में बड़ी संख्या में नई कक्षाओं की आवश्यकता है। एक नई कक्षा के निर्माण के लिए सामान्यतः करीब 12 लाख रुपये का फंड मंजूर किया जाता है। हालांकि, कई गांवों में स्कूलों के पास उचित इमारत तक उपलब्ध नहीं है। बीड जिले में 63 स्कूलों की स्थिति बेहद दयनीय बताई गई है।
इस संबंध में शिक्षा उपसंचालक कैलास दातखिल से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि स्कूल भवनों के लिए जिला वार्षिक योजना के माध्यम से फंड उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, कई गांवों के स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, यह भी सच है। समग्र शिक्षा अभियान के माध्यम से भी इन कार्यों के लिए फंड मिलता है, लेकिन कई गांवों में अब भी समस्याएं बनी हुई हैं।
बदहाल स्कूलों के आंकड़े
मराठवाड़ा की 443 स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। 2,477 स्कूलों में बनाए गए शौचालयों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। 2,996 स्कूलों में चारदीवारी नहीं है, जबकि 1,642 स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा 1,966 स्कूलों में खेल का मैदान नहीं है। मध्याह्न भोजन यानी खिचड़ी पकाने के लिए 854 स्कूलों में शेड या उचित स्थान नहीं है। वहीं 4,174 स्कूलों में आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं हैं।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं तक पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठने से पहले बुनियादी ढांचे की स्थिति सुधारना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्राथमिकता पालकमंत्री के हाथ में
जिला वार्षिक योजना के माध्यम से स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं के लिए फंड उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी है। हालांकि, जिला स्तर पर किस काम को प्राथमिकता दी जाए, इसका निर्णय प्रशासनिक स्तर पर नहीं होता। प्राथमिकता तय करने का अधिकार पालकमंत्री के पास होता है।
एक कक्षा पर 12 लाख रुपये तक खर्च
एक कक्षा की मरम्मत के लिए अनुमानित तीन से दस लाख रुपये तक खर्च आता है। वहीं नई स्कूल इमारत का निर्माण करने के लिए करीब 12 लाख रुपये के फंड की आवश्यकता होती है। इस राशि में एक सुसज्जित कक्षा तैयार की जा सकती है।
