मौत के बाद भी परिवार में दूरियां; पिता का गांव में तो मां-बेटे का शहर में अंतिम संस्कार, मोबाइल की किस्त या पारिवारिक विवाद?

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
खवड्या डोंगर पर चांदगुडे परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत के बाद भी परिवार के बीच चल रहा विवाद सामने आया है। पिता का अंतिम संस्कार उनके मूल गांव में, जबकि मां और बेटे का अंतिम संस्कार शहर में किया गया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इस दर्दनाक घटना के पीछे केवल मोबाइल की किस्त को लेकर हुआ विवाद था या इसके पीछे संपत्ति, खेती और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ा कोई बड़ा विवाद था? पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
खवड्या डोंगर पर शुक्रवार को कुणाल चांदगुडे (19) ने कथित तौर पर आत्महत्या के इरादे से चट्टान के किनारे जाकर खड़े होने की कोशिश की। बेटे को बचाने के लिए उनके पिता मुरलीधर चांदगुडे (48) भी वहां पहुंचे। कुणाल को बचाने के प्रयास में दोनों गहरी खाई में गिर गए। यह देखकर मां संगीता चांदगुडे (42) भी सदमे में आ गईं और उन्होंने भी खाई में छलांग लगा दी। इस घटना में तीनों की मौत हो गई।
मृतकों के अंतिम संस्कार अलग-अलग स्थानों पर
पुलिस की जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात मुरलीधर चांदगुडे का शव उनके रिश्तेदारों को सौंपा गया। इसके बाद उनके मूल गांव धनगर पिंपलगांव, तहसील अंबड में अंतिम संस्कार किया गया। वहीं संगीता और कुणाल के शव उनके मायके के रिश्तेदारों को सौंपे गए। दोनों का अंतिम संस्कार शहर के मुकुंदवाड़ी श्मशानभूमि में किया गया।
डॉक्टर बनने का सपना देख रहे थे कुणाल
कुणाल डॉक्टर बनना चाहते थे और नीट-यूजी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उनके पिता मुरलीधर एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में चालक के रूप में काम करते थे। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से मोबाइल की बकाया किस्त को लेकर कुणाल और उनके पिता के बीच मतभेद चल रहे थे।
शुक्रवार सुबह कुणाल क्लास के लिए घर से निकले और खवड्या डोंगर पहुंच गए। इसकी जानकारी मिलने के बाद उनके माता-पिता और रिश्तेदार वहां पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे तक कुणाल को समझाने और वापस लाने का प्रयास किया गया। इसी दौरान उसे पकड़ने के प्रयास में मुरलीधर भी खाई में गिर गए। इसके बाद संगीता ने भी खाई में छलांग लगा दी।
क्या केवल मोबाइल की किस्त थी वजह?
पुलिस का कहना है कि कुणाल के इस कदम के पीछे केवल मोबाइल की किस्त को लेकर हुआ विवाद था, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। परिवार में संपत्ति, खेती और रिश्तेदारों से जुड़े विवाद की भी जानकारी सामने आई है। इसलिए पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की गहराई से जांच कर रही है।
करीब दो महीने से पारिवारिक तनाव?
जानकारी के अनुसार, चांदगुडे परिवार करीब चार महीने पहले देवलाई क्षेत्र में किराए के मकान में रहने आया था। पुलिस को करीब दो महीने पहले परिवार में विवाद होने की जानकारी मिली थी। अगस्त में संगीता ने सोशल मीडिया पर संपत्ति, खेती, बेटे और कुछ रिश्तेदारों को लेकर रील के रूप में वीडियो पोस्ट किए थे। इन पोस्ट के बाद पारिवारिक तनाव की आशंका जताई जा रही है।
बड़े बेटे की मौत के बाद संगीता का कुणाल के प्रति काफी लगाव था। कुणाल की मौत के बाद परिवार के सदस्यों के बीच पुराने विवाद और सोशल मीडिया पोस्ट भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं।
कुणाल की याद में ‘शेरू’ भी उदास
कुणाल को अपने पालतू कुत्ते ‘शेरू’ से बेहद लगाव था। पिछले छह वर्षों से परिवार शेरू की देखभाल कर रहा था और कुणाल उसकी विशेष रूप से देखभाल करते थे। कुणाल की मौत के बाद शेरू भी लगातार उसकी तलाश करता दिखाई दे रहा है। शनिवार को शेरू को बिस्किट खिलाते समय कुणाल के नाना बाबनराव गाभुड की आंखें भी नम हो गईं।
परिवार चाहता था कि कुणाल डॉक्टर बने। परिजनों के अनुसार, वह शांत स्वभाव का और होनहार युवक था। उसकी मौत के बाद पूरा परिवार सदमे में है।
पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच
पुलिस उपायुक्त रत्नाकर नवले के अनुसार, घटना के पीछे कई कारण होने की संभावना है। केवल मोबाइल की किस्त को घटना का कारण मानना जल्दबाजी होगी। दोनों परिवारों के बयान दर्ज किए जाएंगे और सोशल मीडिया पोस्ट सहित अन्य परिस्थितियों की भी जांच की जाएगी।
पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस दर्दनाक घटना के पीछे मोबाइल की किस्त का विवाद था, पारिवारिक कलह थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
