औरंगाबाद में अवैध हाथगाड़ियों पर कार्रवाई के दौरान फोन आए तो भी कार्रवाई न रोकें: मनपा आयुक्त

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
शहर के किसी भी सड़क पर हाथगाड़ियों के कारण यातायात में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो अनधिकृत हाथगाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कार्रवाई के दौरान किसी का फोन आने पर कार्रवाई न रोकें, बल्कि फोन करने वाले की जानकारी दर्ज करें। कार्रवाई का विरोध करना कानून का विरोध करना है। यदि कोई व्यक्ति कार्रवाई का विरोध करता है तो उसकी शिकायत करें, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ऐसा स्पष्ट निर्देश औरंगाबाद महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे ने दिया।
महानगरपालिका की स्थगित स्थायी समिति की बैठक मंगलवार को सभापति अनिल मकरिये की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में नगरसेवक राजगौरव वानखेडे ने शहर में बढ़ती हाथगाड़ियों की समस्या का मुद्दा उठाया।
वानखेडे ने कहा कि शहर के प्रमुख और वीआईपी मार्गों पर भी हाथगाड़ियां बेखौफ खड़ी की जा रही हैं। दिल्ली गेट, हर्सूल टी-पॉइंट और लेबर कॉलोनी जैसे वीआईपी मार्गों पर भी हाथगाड़ियों के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है।
महानगरपालिका के पूर्व रिकॉर्ड के अनुसार शहर में पंजीकृत हाथगाड़ियों की संख्या करीब 14 हजार है। हालांकि, वर्तमान में शहर में इससे कहीं अधिक हाथगाड़ियां संचालित हो रही हैं। इनमें से कई अनधिकृत हाथगाड़ियों का रिकॉर्ड महानगरपालिका के पास उपलब्ध नहीं है। अनधिकृत हाथगाड़ियां कहीं भी खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
वानखेडे ने कहा कि एक तरफ महानगरपालिका की अतिक्रमण हटाओ टीम के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की शिकायत की जाती है और दूसरी तरफ कार्रवाई शुरू होने पर हाथगाड़ी छोड़ने के लिए अधिकारियों को फोन किए जाते हैं। यह दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। सभी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को हाथगाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए महानगरपालिका एक विशेष टास्क फोर्स गठित करे, जिसमें पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति हो। शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक विशेष अभियान चलाकर सड़कों को अतिक्रमणमुक्त किया जा सकता है। उन्होंने शहर की सड़कों को अतिक्रमणमुक्त कर यातायात के लिए सुचारु बनाने की मांग की।
इस पर मनपा आयुक्त अमोल येडगे ने कहा कि फेरीवाला नीति को लेकर अगले एक महीने के भीतर निश्चित रूप से निर्णय लिया जाएगा। तब तक अतिक्रमण हटाओ विभाग उन क्षेत्रों की पहचान कर रिकॉर्ड तैयार करे, जहां हाथगाड़ियों के कारण परेशानी हो रही है और वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कार्रवाई के दौरान किसी का फोन आने पर कार्रवाई नहीं रोकी जाए।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई का विरोध करना कानून का विरोध करना है। यदि किसी व्यक्ति की ओर से कार्रवाई रोकने के लिए फोन किया जाता है तो उसकी शिकायत दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि फेरीवाला नीति अभी तक अंतिम रूप से निर्धारित नहीं हुई है। अब तक फेरीवाला संगठन के चुनाव के कारण यह प्रक्रिया लंबित थी। चुनाव संपन्न हो चुके हैं, लेकिन मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आयुक्त ने विधि अधिकारी अपर्णा थेटे को निर्देश दिया कि इस मामले का प्रभावी रूप से फॉलोअप किया जाए और महानगरपालिका की ओर से न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखा जाए।
