मनोज जरांगे-पाटील ने 90 दिनों के लिए उपवास स्थगित किया, आंदोलन जारी रखने का ऐलान

बीड | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे-पाटील ने आज, 17 सितंबर को अपना उपवास 90 दिनों के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया। बीड जिले के पाटोदा में महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के बाद जरांगे-पाटील ने यह घोषणा की। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उपवास स्थगित किया गया है, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा।
मनोज जरांगे-पाटील ने सरकार को 90 दिनों की मोहलत दी है। उन्होंने मांग की कि शासन निर्णय (जीआर) जारी कर गजटियर की सिफारिशों को लागू किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि मराठा समाज से संबंधित 58 लाख रिकॉर्ड में से एक भी रिकॉर्ड कम नहीं किया जाना चाहिए। इन रिकॉर्ड को कम नहीं किया जाएगा, इसकी सरकार लिखित गारंटी दे, ऐसी मांग भी उन्होंने की।
जरांगे-पाटील ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उन्हें धोखा दिया या अपना वादा पूरा नहीं किया, तो वे दोबारा मुंबई का रुख करेंगे। वहीं, मुंबई की ओर गए 1 लाख 7 हजार समर्थकों से वापस लौटने की अपील भी उन्होंने की।
बीड जिले के पाटोदा में सरकार के प्रतिनिधिमंडल और मनोज जरांगे-पाटील के बीच चर्चा हुई। इसके बाद जरांगे-पाटील ने कहा कि वह अगले तीन महीने तक सरकार पर भरोसा करने के लिए तैयार हैं।
आज सुबह करीब 5 बजे सरकार का प्रतिनिधिमंडल मनोज जरांगे-पाटील से मुलाकात के लिए पाटोदा पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, मंत्री दादा भुसे, विधायक प्रसाद लाड और विधायक सुरेश धस शामिल थे। मनोज जरांगे-पाटील और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा हुई।
इस दौरान मनोज जरांगे-पाटील ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मराठा समाज को उकसाना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जो लोग अब तक चर्चा नहीं कर रहे थे, क्या वे आज चर्चा के लिए आए हैं? उन्होंने कहा कि आरक्षण से ज्यादा समाज का सम्मान महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मेरे दुश्मन नहीं हैं। लेकिन अगर सामने से हमला किया जाएगा, तो हम क्या करेंगे?, ऐसा सवाल भी जरांगे-पाटील ने उठाया।
उन्होंने यह भी कहा कि राधाकृष्ण विखे पाटील से गलतियां हो रही हों, फिर भी उनसे प्रेम करें। एकनाथ शिंदे से भी प्रेम करेंगे, लेकिन अभी नहीं। मंत्रियों की ओर से आलोचना की गई तो हम चुप नहीं बैठेंगे, ऐसा स्पष्ट संकेत भी मनोज जरांगे-पाटील ने दिया।
अब सरकार को दी गई 90 दिनों की अवधि के दौरान मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।