‘डॉक्टर डेथ’ गिरफ्तार: 100 से अधिक हत्याएं और 125 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला कुख्यात सीरियल किलर डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा दबोचा गया

नई दिल्ली। क्राइम ब्रांच की टीम ने देश के सबसे खतरनाक अपराधियों में से एक, पैरोल से फरार चल रहे कुख्यात सीरियल किलर डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को ‘डॉक्टर डेथ’ के नाम से जाना जाता है और उस पर 100 से अधिक हत्याएं और 125 से ज्यादा अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का गंभीर आरोप है।
आरोपी की पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि
डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा मूल रूप से अलीगढ़ के थाना छबड़ा, गांव पुरैनी का निवासी है। उसने 1995 से 2004 के बीच अपने गिरोह के साथ मिलकर 100 से अधिक लोगों की हत्या की थी। वह मारे गए लोगों के शव कासगंज की हजारा नहर में फेंक देता था, जहां मगरमच्छ उन्हें खा जाते थे, ताकि सबूत न मिल सकें।
किडनी रैकेट का भी सरगना
1998 से 2004 के बीच उसने डॉ. अमित के साथ मिलकर 125 से अधिक लोगों की किडनी का अवैध ट्रांसप्लांट कराया। एक ट्रांसप्लांट के बदले 5 से 7 लाख रुपये वसूले जाते थे। वह बिहार, बंगाल और नेपाल से गरीब लोगों को बहला-फुसलाकर लाता था। वर्ष 2004 में उसकी गिरफ्तारी के बाद यह पूरा किडनी रैकेट सामने आया था।
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी और सजा
डॉ. देवेंद्र के खिलाफ 21 हत्या मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। उसे दिल्ली में सात मामलों में उम्रकैद और गुरुग्राम में एक केस में फांसी की सजा मिल चुकी है। 9 जून 2023 को वह दो महीने की पैरोल पर बाहर आया था, लेकिन 3 अगस्त को सरेंडर नहीं किया और फरार हो गया।
आश्रम में छुपकर बना बैठा था बाबा
पुलिस के अनुसार, फरारी के दौरान वह राजस्थान के दौसा जिले में एक आश्रम में बाबा बनकर रह रहा था और लोगों का इलाज भी कर रहा था। क्राइम ब्रांच की टीम ने वहां दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह 50 हत्याओं तक गिनती रखता था, उसके बाद उसे खुद भी याद नहीं कि कितनों की हत्या की।
कैसे करता था वारदातें
शुरुआत में वह फर्जी गैस एजेंसी और अस्पताल के नाम पर ठगी करता था। बाद में उसने टैक्सी और ट्रक बुक कर ड्राइवरों की हत्या शुरू की और वाहन बेच दिए। शवों को नहर में फेंक देता ताकि कोई सुराग न बचे। मगरमच्छ शवों को खा जाते थे, जिससे पुलिस को कभी सबूत नहीं मिल सके।
क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के लिए यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। करीब छह महीने की छानबीन और जयपुर, दिल्ली, अलीगढ़, आगरा, प्रयागराज जैसी जगहों पर तलाश के बाद आखिरकार दौसा में उसकी लोकेशन ट्रेस हुई और गिरफ्तारी संभव हो सकी।
फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके नेटवर्क की जांच जारी है।
