मीरा रोड पर मराठी अस्मिता की हुंकार: मनसे की रैली में हज़ारों जुटे, उद्धव गुट और स्थानीय संगठनों का भी समर्थन, सरनाइक पर बोतल फेंकी गई
प्रवासी बनाम मराठी विवाद गहराया, फडणवीस ने दी सफाई

ठाणे/मीरा-भायंदर: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एक बार फिर मराठी अस्मिता के मुद्दे पर अपनी सियासी जमीन तलाशने की कोशिश की। मंगलवार को मीरा रोड में ‘मराठी विरोध’ के खिलाफ बुलाई गई रैली में हजारों लोग शामिल हुए। पुलिस की तमाम सख़्ती और बंदिशों के बावजूद सड़कों पर मराठी अस्मिता के समर्थन में नारे गूंजे। रैली में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना और कई स्थानीय संगठनों ने भी खुलकर समर्थन दिया।
🔥 विवाद की जड़: मराठी न बोलने पर फूड स्टॉल संचालक की पिटाई
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब मनसे के ठाणे जिला अध्यक्ष अविनाश जाधव और उनके साथियों ने एक फूड स्टॉल संचालक को मराठी भाषा में जवाब न देने पर कथित तौर पर पीट डाला। यह वीडियो वायरल हुआ और इसके बाद पुलिस ने सोमवार शाम जाधव को हिरासत में लिया।
इस गिरफ्तारी के विरोध में मनसे ने मंगलवार को मीरा-भायंदर इलाके में विशाल रैली का ऐलान किया, जो “महाराष्ट्र एकीकरण समिति” के बैनर तले आयोजित की गई। मनसे का आरोप था कि “प्रवासी व्यापारियों के दबाव में पुलिस मराठियों को उनकी ही धरती पर परेशान कर रही है।”
👮♀️ प्रशासन की सख्ती, कार्यकर्ता हिरासत में
मीरा-भायंदर में सुबह से ही भारी पुलिस बंदोबस्त रहा। मनसे कार्यकर्ताओं को जगह-जगह हिरासत में लिया गया, जिससे नाराज़गी और भड़क गई। इसके बावजूद लोग सड़कों पर उतरे और नारेबाजी की। भीड़ ने “जय महाराष्ट्र” और “मराठी मानूस जिंदाबाद” के नारे लगाए।
⚠️ प्रताप सरनाइक पर बोतल फेंकी गई
रैली में एकनाथ शिंदे गुट के विधायक प्रताप सरनाइक भी पहुंचे, लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें वहां से दौड़ा दिया और बोतलें फेंकी। सरनाइक मीरा रोड क्षेत्र के स्थानीय विधायक हैं। उनके खिलाफ यह गुस्सा मनसे और शिवसेना (उद्धव गुट) के कार्यकर्ताओं से आया, जो शिंदे गुट को मराठी भावना विरोधी मानते हैं। इस घटना से राजनीति और ज़्यादा गरमा गई है।
🗣️ देवेंद्र फडणवीस की सफाई
मामले पर राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा,
“रैली के आयोजन का विरोध नहीं है। समस्या केवल उस मार्ग को लेकर थी, जिसके लिए आयोजकों ने अनुमति मांगी थी। वहां ट्रैफिक बाधित होने और भगदड़ की आशंका थी।”
फडणवीस ने कहा कि पुलिस ने वैकल्पिक मार्ग सुझाए थे, लेकिन आयोजक एक ही विशेष मार्ग पर अड़े रहे, जिससे प्रशासनिक अड़चनें आईं। उन्होंने आगे कहा कि “हर किसी को रैली करने का अधिकार है, बशर्ते वो तय नियमों के मुताबिक हो।”
🎯 क्या कहती है जनता?
मनसे समर्थकों का कहना है कि “अगर प्रवासी व्यापारियों को सड़कों पर प्रदर्शन की अनुमति दी जाती है, तो मराठियों को उनकी ही जमीन पर क्यों रोका जा रहा है?”
🔍 निष्कर्ष:
राज ठाकरे की मनसे ने मराठी अस्मिता के नाम पर एक बार फिर सक्रियता दिखाकर राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। उद्धव ठाकरे गुट और कई संगठनों का समर्थन मिलना यह संकेत देता है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा और गहराने वाला है।
सरकार को अब यह तय करना होगा कि वो भाषा और अस्मिता जैसे संवेदनशील मुद्दों को कैसे संतुलित तरीके से हैंडल करती है, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे और प्रशासन की विश्वसनीयता भी।
