गुरमीत राम रहीम के खिलाफ नपुंसक बनाने का मामला, जान से मारने की धमकियों के बाद गवाह के परिवार की सुरक्षा बहाल
डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ गवाही देने वाले पीड़ित गवाह के परिवार को जान से मारने की धमकी, हरियाणा पुलिस ने दी सुरक्षा

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह द्वारा अनुयायियों को कथित रूप से नपुंसक बनाने के सनसनीखेज मामले में मुख्य गवाह और पीड़ित के परिवार को लगातार मिल रही धमकियों के बीच हरियाणा पुलिस ने अब उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई है। यह वही गवाह है जिसकी याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम और दो डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
गवाह वर्तमान में अमेरिका में रह रहा है, लेकिन उसने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरियाणा के सीबीआई विशेष मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया है। उसकी जिरह अभी बाकी है। गवाह के परिजन फतेहाबाद जिले के टोहाना क्षेत्र में रहते हैं और डेरा समर्थकों से मिली जान से मारने की धमकियों के चलते भयभीत हैं।
गवाह के वकील नवकिरण सिंह ने बताया कि 25 मार्च और 8 अप्रैल को ही सीबीआई को पत्र भेजकर सुरक्षा की मांग की गई थी। आरोप लगाया गया कि राम रहीम किसी भी समय गवाह या उसके परिवार को मरवा सकता है। 24 मई को परिवार की सुरक्षा अचानक हटा ली गई, जिसके बाद डेरा समर्थकों द्वारा उन्हें धमकियां दी गईं। इसकी शिकायत 26 मई को फतेहाबाद एसपी, सीबीआई और हाईकोर्ट को की गई थी।
गवाह की पत्नी ने सीबीआई और अदालत को बताया कि उनके तीन बच्चों सहित पूरे परिवार को डर का माहौल बना दिया गया है। 6 जून को सीबीआई मुख्यालय, नई दिल्ली द्वारा हरियाणा पुलिस के एडीजीपी (सुरक्षा) को पत्र लिखकर पर्याप्त सुरक्षा की मांग की गई थी। इसके बाद 11 जून को हरियाणा के सीबीआई विशेष मजिस्ट्रेट के निर्देश पर चंडीगढ़ स्थित सीबीआई शाखा ने भी 14 जुलाई को फिर से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य पुलिस को पत्र भेजा।
इन प्रयासों के बाद आखिरकार हरियाणा पुलिस ने परिवार को सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध करा दी है। अब सवाल उठता है कि क्या राम रहीम और उसके अनुयायियों का यह दबाव और धमकी का खेल कभी रुकेगा? या फिर गवाहों और पीड़ितों को न्याय के लिए इस तरह डर और खतरे में जीना पड़ेगा?
यह मामला न केवल राम रहीम के आपराधिक इतिहास को उजागर करता है, बल्कि भारत में गवाह सुरक्षा की स्थिति पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
