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औरंगाबाद में “उर्दू इंग्लिश ग्रामर” पुस्तक का भव्य लोकार्पण, स्व. हाजी मोहम्मद हनीफ साहब को दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि

जालना/कादरी हुसैन

औरंगाबाद: शहर में एक गरिमापूर्ण शैक्षणिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय हाजी मोहम्मद हनीफ साहब द्वारा तैयार की गई महत्वपूर्ण पुस्तक “उर्दू इंग्लिश ग्रामर” का लोकार्पण बड़े सम्मान और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम न केवल एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल को समर्पित रहा, बल्कि एक समर्पित शिक्षक के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का भी अवसर बना।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मौलाना डॉ. मोहम्मद सदरुल हसन नदवी मदनी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में स्वर्गीय के शिष्य हाजी अब्दुल अजीज साहब (सेवानिवृत्त सेशन कोर्ट जज) उपस्थित रहे। इस अवसर पर शहर एवं अन्य जिलों से कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें अब्दुल लतीफ खान (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, पुणे कॉलेज), मुश्ताक अहमद खान स्वाती (सेवानिवृत्त कार्यकारी अभियंता), ख्वाजा मोइनुद्दीन साहब (ठेकेदार), हाजी इसहाक साहब (पूर्व नगरसेवक, सिल्लोड़), मसूद अख्तर (सेवानिवृत्त शिक्षक, मदीनतुल उलूम स्कूल, नांदेड़), वाजिद कादरी (अध्यक्ष, अल-हिरा एजुकेशन सोसाइटी, औरंगाबाद) तथा मोहसिन अहमद (पूर्व नगरसेवक) शामिल थे।

कार्यक्रम की शुरुआत कारी मोहम्मद सलीम (इमाम, मरमर मस्जिद) द्वारा प्रभावशाली कुरआन पाठ से हुई। इसके पश्चात सैयदा फातिमा ने नात पेश कर माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।

इस अवसर पर शेख अहमद शेख रसूल ने “उर्दू इंग्लिश ग्रामर” पुस्तक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पुस्तक उर्दू और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं के व्याकरण को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाने का उत्कृष्ट प्रयास है, जो विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

वाजिद कादरी ने अपने संबोधन में स्वर्गीय मोहम्मद हनीफ साहब के जीवन, उनकी शैक्षणिक सेवाओं और उनके समर्पण को याद करते हुए कहा कि एक सच्चा शिक्षक समाज को सही दिशा देता है और हनीफ साहब ऐसे ही आदर्श शिक्षक थे।

अध्यक्षीय भाषण में मौलाना डॉ. सदरुल हसन नदवी मदनी ने भाषा सीखने में व्याकरण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी भाषा में दक्षता प्राप्त करने के लिए उसके नियमों की समझ आवश्यक है, और यह पुस्तक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम का संचालन मोहम्मद यासिर अशरफ खान ने किया, जबकि अंत में मोहम्मद आसिफ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर सभी अतिथियों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

इस कार्यक्रम में औरंगाबाद, नांदेड़ तथा परभणी से आए शिक्षकों, विद्यार्थियों और नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम सफल एवं यादगार बन गया। विद्वानों ने इस पुस्तक को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि “उर्दू इंग्लिश ग्रामर” विद्यार्थियों को व्याकरण में दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और शिक्षा के क्षेत्र में एक मूल्यवान योगदान सिद्ध होगी।

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