जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जालना मर्चेंट बैंक अनियमितता संबंधी बैठक संपन्न, जुलाई तक बीमा राशि मिलने की संभावना
जमाकर्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं – जिलाधिकारी आशिमा मित्तल

जालना/ कादरी हुसैन
जालना मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक में हुई अनियमितताओं पर जिला प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। साथ ही, बैंक के जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जमाकर्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है, ऐसा आवाहन जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने किया है।
जालना मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक में हुए वित्तीय अनियमितताओं की पृष्ठभूमि में आज जिलाधिकारी कार्यालय में जिलाधिकारी आशिमा मित्तल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिला उपनिबंधक (सहकारी संस्था) संजय बोराडे, बैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी कांचन केळकर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इस दौरान जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने कहा कि जमाकर्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित विभागों को आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े उपाय लागू किए जाएंगे। उन्होंने यह भी अपील की कि जमाकर्ता अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा रखें।
बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री केळकर ने बैंक की वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि बैंक के विलय (मर्जर) को लेकर चर्चा जारी है, जिसकी प्राथमिक जानकारी 1 अप्रैल 2026 को दी गई थी। साथ ही, छत्रपति संभाजीनगर स्थित देवगिरी सहकारी बैंक द्वारा बैंक का ऑडिट और दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया जारी है।
बैंक की आर्थिक स्थिति के बारे में उन्होंने बताया कि वर्तमान में बैंक में लगभग 173 करोड़ रुपये की जमा राशि है, जिसमें से लगभग 127 करोड़ रुपये ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं। इसके अलावा, बैंक की स्वयं की पूंजी, अन्य बैंकों में निवेश तथा सरकारी बॉन्ड्स में निवेश मिलाकर लगभग 75 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं।
बैंक के कुल लगभग 50 हजार खाताधारक हैं, जिनमें से 49 हजार से अधिक खाताधारकों को जमा बीमा योजना के अंतर्गत लाभ मिलने की संभावना है। वर्तमान में विभिन्न शाखाओं में बीमा दावा फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया चल रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पात्र जमाकर्ताओं के खातों में बीमा राशि जुलाई 2026 तक जमा होने की संभावना है।
इस अवसर पर जिलाधिकारी आशिमा मित्तल और जिला उपनिबंधक संजय बोराडे ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे शांत रहें और केवल बीमा दावा फॉर्म जमा करने के लिए ही बैंक शाखाओं में जाएं। अफवाहों पर विश्वास न करते हुए बैंक को सहयोग करें।
डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) क्या है?
जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए कार्यरत डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC), भारतीय रिजर्व बैंक की एक सहायक संस्था है, जिसकी स्थापना 15 जुलाई 1978 को हुई थी। यदि कोई बैंक बंद हो जाता है या उसका लाइसेंस रद्द हो जाता है, तो यह संस्था प्रत्येक खाताधारक को बचत, चालू, सावधि और आवर्ती जमा पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा सुरक्षा प्रदान करती है।
यह बीमा सभी वाणिज्यिक, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों पर लागू होता है। इसका प्रीमियम खाताधारकों से नहीं बल्कि संबंधित बैंकों से लिया जाता है। बैंक संकट में आने पर DICGC के माध्यम से लगभग 90 दिनों के भीतर दावा प्रक्रिया पूरी कर पात्र जमाकर्ताओं को राशि प्रदान की जाती है, जिससे उनके आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। यह जानकारी जिला अग्रणी बैंक के प्रबंधक मंगेश केदार ने दी।
