महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: महायुति-एमवीए के गठबंधनों पर संकट के बादल!

महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण उभरते दिख रहे हैं। हाल ही में एनसीपी प्रमुख शरद पवार द्वारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की प्रशंसा और उन्हें सम्मानित किए जाने के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेताओं में नाराजगी बढ़ गई है। इसी के साथ शिवसेना (उबाठा) के नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ लगातार हो रही मुलाकातें भी चर्चा का विषय बन गई हैं।
महायुति में उभरते मतभेद
महायुति गठबंधन, जिसमें भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट), और एनसीपी (अजीत पवार गुट) शामिल हैं, में मतभेद स्पष्ट रूप से उभर रहे हैं। हाल ही में नासिक और रायगढ़ के लिए प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति पर शिवसेना (शिंदे गुट) की नाराजगी के बाद नियुक्ति पर रोक लगा दी गई। इससे गठबंधन के भीतर खींचतान के संकेत मिल रहे हैं।
एमवीए में भी उठे सवाल
महाविकास आघाड़ी (एमवीए) में भी संकट गहराता जा रहा है। आदित्य ठाकरे ने हाल ही में दिल्ली में राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की, लेकिन शरद पवार से भेंट नहीं की। शिवसेना (उबाठा) के नेताओं का मानना है कि पार्टी को अब अपनी स्वतंत्र राह तय करनी चाहिए।
स्थानीय निकाय चुनावों पर असर
मुंबई, पुणे और ठाणे में होने वाले आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर सभी पार्टियां तैयारियों में जुट गई हैं। यह चुनाव राज्य में राजनीतिक शक्ति संतुलन को नया रूप दे सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषक अभय देशपांडे का कहना है कि दोनों गठबंधन अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं और गठबंधन में बदलाव भी संभव है।
पवार की शिंदे को सम्मानित करने पर विवाद
एनसीपी प्रमुख शरद पवार द्वारा शिंदे को मराठा योद्धा महादजी शिंदे के नाम पर स्थापित पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर शिवसेना (उबाठा) ने नाराजगी जाहिर की। संजय राउत ने इसे “विश्वासघात” करार दिया।
महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कौन-से नए गठबंधन उभरते हैं और कौन-से टूटते हैं।