मराठा आरक्षण पर मचा घमासान: मराठा क्रांती मोर्चा ने कहा – आरक्षण चाहिए तो सिर्फ मराठा के नाम से, कुणबी वर्गीकरण मंजूर नहीं

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा दिनों-दिन गंभीर होता जा रहा है। कुणबी वर्गीकरण से शुरू हुआ विवाद अब और भी तेज हो गया है। इसी को लेकर मराठा क्रांती मोर्चा ने स्पष्ट रुख अपनाया है। राज्य समन्वयक सुनील नागणे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि, “हमें आरक्षण कुणबी के तौर पर नहीं चाहिए, हमें यह सिर्फ मराठा के नाम से चाहिए और वह भी 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर।”
कुणबी वर्गीकरण का विरोध
हाल ही में सरकार ने हैदराबाद गजेटियर के आधार पर जाति प्रमाणपत्र मंजूर करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस पर आपत्ति जताते हुए नागणे ने कहा, “यदि सरसकट शब्द हटाकर आरक्षण दिया गया तो यह कानून की कसौटी पर टिक नहीं पाएगा। जिनका रिकॉर्ड मराठा के नाम से दर्ज है, उन्हें कुणबी कहना उचित नहीं होगा।” उन्होंने आगे कहा कि, पिछले 45 वर्षों से मराठा समाज आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में कुणबी आरक्षण का रास्ता समाज के लिए स्थायी समाधान नहीं होगा।
जरांगे पाटिल से मतभेदों का किया खंडन
पत्रकार परिषद में नागणे ने यह भी साफ किया कि उनका मनोज जरांगे पाटिल से कोई विरोध नहीं है। “हम जरांगे के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारा रुख अलग है। हम आरक्षण सिर्फ मराठा के नाम से चाहते हैं, कुणबी वर्गीकरण हमें स्वीकार नहीं।”
25 साल का संघर्ष और बलिदान
नागणे ने आंदोलनकारियों के बलिदान को याद करते हुए कहा, “पिछले 25 वर्षों में 500 से ज्यादा लोग आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई लोगों ने अपने घर-बार बेचे, जमीनें गिरवी रखीं, लेकिन वे प्रचार के लिए नहीं, बल्कि समाज के हक के लिए लड़े। हमने कभी किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं उठाया, हम केवल संविधान द्वारा मिले अधिकार के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं।”
सरकार से तुरंत रुख स्पष्ट करने की मांग
नागणे ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि आरक्षण नहीं मिला तो मराठा समाज का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। “यह किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारे हक की ठोस मांग है। सरकार को मराठा के नाम से ही आरक्षण देना होगा।”
