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सड़क पर पानी, सिस्टम की लापरवाही और तबाही: हादसे ने छीन ली एक ही परिवार से पांच जिंदगियां

मैनपुरी के बेवर थाना क्षेत्र में जीटी रोड हाईवे पर ग्राम नगला ताल के पास बुधवार रात एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक 11 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे की मुख्य वजह हाईवे पर जलभराव और ट्रक के पहियों से उड़े पानी को बताया जा रहा है, जिससे कार अनियंत्रित होकर गर्डर लदे ट्रोला से जा टकराई।

इस हृदयविदारक हादसे में कन्नौज के रहने वाले आढ़ती दीपक (36), उनकी पत्नी पूजा (34), बेटियां आशी (9), आर्या (4), बहन सुजाता (35) की मौके पर ही मौत हो गई। 11 वर्षीय आराध्या को गंभीर हालत में सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा इतना भयानक था कि कार में फंसे सभी लोग बुरी तरह जख्मी हो गए थे और मासूम बच्चियां मौके पर ही दम तोड़ चुकी थीं। स्थानीय लोगों ने जबतक बचाने की कोशिश की, तबतक एक-एक कर सभी की सांसें थम चुकी थीं।

परिवार एक पारिवारिक कार्यक्रम से लौट रहा था जब यह हादसा हुआ। कार चला रहे दीपक की गति सामान्य थी, लेकिन हाईवे पर भरे पानी को तेज गति से गुजरते ट्रक के पहियों से उड़े पानी ने अचानक उनकी विंडशील्ड पर टक्कर मारी, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और कार डिवाइडर पार करते हुए विपरीत दिशा में जाकर ट्रोले से टकरा गई।

इस दर्दनाक हादसे के पांच मिनट बाद उसी स्थान के पास एक और दुर्घटना हुई, जिसमें बिहार जा रही एक पिकअप वैन पीछे से डीसीएम में जा घुसी। पिकअप चालक एहसान वाहन में फंस गया, जिसे स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से निकालकर सीएचसी बेवर में भर्ती कराया गया।

घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हाईवे पर जलभराव की शिकायत पहले से थी, लेकिन कोई ठोस उपाय नहीं किया गया। हादसे के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर जल निकासी के लिए डिवाइडर में कटिंग की गई।

आईरेड एप पर अपलोड की गई रिपोर्ट में बताया गया कि बीते छह महीनों में मैनपुरी क्षेत्र में दर्ज 50 सड़क हादसों में से 60% मामलों में वाहन चालकों का ध्यान भंग होना मुख्य वजह रहा, जबकि 20% हादसों की वजह रोड इंजीनियरिंग की खामियां, भारी ट्रैफिक और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पाई गई। इसके बावजूद हादसों की समीक्षा की रफ्तार धीमी है, जिससे यह सवाल उठता है कि जब तक असली कारणों की पहचान नहीं होगी, तब तक समाधान कैसे होगा?

यह हादसा न केवल एक परिवार के खत्म होने का प्रतीक है, बल्कि सरकारी तंत्र की लापरवाही और अव्यवस्था का एक और दर्दनाक उदाहरण भी बन गया है।

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