सामाजिक कार्यकर्ता साद बीन मुबारक का बड़ा खुलासा: RTI से जालना मनपा में भ्रष्टाचार और अतिक्रमण की परतें उजागर

जालना/कादरी हुसैन
जालना शहर महानगरपालिका में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और बढ़ते अतिक्रमण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता साद बीन मुबारक ने गंभीर आरोप लगाए हैं। वर्ष 2022 से लगातार किए गए आवेदन, शिकायतें और सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दुखी नगर, मिल्लत नगर, बाजार चौक, मिलन चौक, शनि मंदिर और नूतन वसाहत सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ है, बावजूद इसके संबंधित विभागों द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कई बार अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के बाद भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहने का आरोप है। RTI में यह भी सामने आया है कि जिन सड़कों की चौड़ाई 12 से 15 मीटर प्रस्तावित है, वे अतिक्रमण के कारण काफी संकरी हो चुकी हैं और आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अतिक्रमण हटाने को लेकर मांगी गई जियो-टैग रिपोर्ट और कार्रवाई विवरण भी अब तक लंबित बताया गया है। साद बीन मुबारक ने अपनी शिकायत में स्वच्छता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कई कर्मचारी बिना काम किए वेतन ले रहे हैं, वहीं ठेकेदार एजेंसियों द्वारा ट्रैक्टर और संसाधनों की गलत जानकारी देकर लाखों रुपये के बिल निकाले जा रहे हैं। मनपा कार्यालय में बिना अनुमति एसी लगाए जाने, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, खरीदे गए ट्रैक्टरों का उपयोग न होना तथा वर्षों से एक ही पद पर जमे अधिकारियों के कारण भ्रष्टाचार बढ़ने जैसे गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं।
इसके अलावा कोरोना काल में पावती पुस्तकों में गड़बड़ी और लाखों रुपये के हिसाब में पारदर्शिता नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है। जिल्हाधिकारी कार्यालय द्वारा 3 नवंबर 2025 को पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। साद बीन मुबारक ने 21 अप्रैल 2026 को आयुक्त को दिए ताजा आवेदन में सभी 14 बिंदुओं पर तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और शहर में बढ़ते अतिक्रमण को हटाने की मांग की है। अब इस पूरे मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर शहरवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।
