महिलाओं के जीवन में सकारात्मक क्रांति लाने वाली प्रेरणादूत; सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती विद्या लंके-कानडे

जालना/कादरी हुसैन
केवल घोषणाबाजी तक सीमित न रहकर, प्रत्यक्ष कार्य के माध्यम से समाज परिवर्तन कैसे किया जा सकता है, इसका सजीव उदाहरण हैं जालना की सामाजिक कार्यकर्ता एवं बाल कल्याण समिति की सदस्य श्रीमती विद्या लंके-कानडे। पिछले दो दशकों से वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में आशा की किरण जगाने का कार्य निरंतर कर रही हैं। उनकी मेहनत और समर्पण के कारण आज हजारों महिलाएं घर की चौखट पार कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।
बचत समूहों से आर्थिक क्रांति
श्रीमती विद्या लंके-कानडे के कार्य की नींव महिला बचत समूहों के माध्यम से रखी गई। केवल बचत तक सीमित न रहकर, उन्होंने इन समूहों में आर्थिक अनुशासन विकसित किया। गृह उद्योगों के जरिए उन्होंने महिलाओं को पापड़, मसाले, अचार और सौंदर्य प्रसाधन जैसे उत्पादों का प्रशिक्षण दिया। साथ ही मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की जानकारी देकर कई महिलाओं को सफल उद्यमी बनने में मदद की।
सामाजिक परिवर्तन की दिशा में पहल
आर्थिक प्रगति के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान दिया। ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर कई गांवों में शराबबंदी के प्रस्ताव पारित करवाने में सफलता हासिल की।
हिंसा के खिलाफ मजबूत सहारा
पिछले 10 वर्षों से परामर्शदाता के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को मानसिक सहारा देने के साथ-साथ उन्हें कानूनी न्याय दिलाने में भी सहयोग किया। सखी वन स्टॉप सेंटर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और मनोधैर्य योजना जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाकर महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ा।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष जोर
मासिक धर्म जैसे विषयों पर फैली सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने के लिए उन्होंने विशेष अभियान चलाए। साथ ही बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करते हुए उनके आत्मसम्मान को बढ़ाने के लिए विभिन्न नवाचार कार्यक्रम आयोजित किए।
विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान
बचत समूह, गृह उद्योग और कौशल विकास प्रशिक्षण, शराबबंदी, बाल विवाह रोकथाम, ग्राम सभा में सहभागिता, मासिक धर्म जागरूकता, बालिकाओं की शिक्षा, घरेलू हिंसा परामर्श और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे अनेक क्षेत्रों में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उनका संदेश
“महिलाएं केवल घर तक सीमित न रहें, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनें, यही मेरे जीवन का उद्देश्य है। भविष्य में भी इस सशक्तिकरण की लड़ाई को और व्यापक स्तर पर ले जाने का मेरा संकल्प है।”
— श्रीमती विद्या लंके-कानडे (सामाजिक कार्यकर्ता एवं सदस्य, बाल कल्याण समिति, जालना)
