जालना घाटी हॉस्पिटल में प्रशासन की बड़ी लापरवाही! विशेष कर्मचारियों का काम सुरक्षा गार्डों से करवाया जा रहा है – क्या मरीजों की जान से खिलवाड़?

जालना/कादरी हुसैन
आज दिनांक 21 मार्च 2026 को जालना के घाटी हॉस्पिटल में एक बार फिर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिससे इमरजेंसी और दुर्घटना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अत्यंत गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को तुरंत इलाज के लिए ले जाने हेतु स्ट्रेचर की व्यवस्था होने के बावजूद, यह काम प्रशिक्षित कर्मचारियों की बजाय सुरक्षा गार्डों से करवाया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, दुर्घटना या गंभीर स्थिति में अस्पताल लाए गए मरीजों को तुरंत इमरजेंसी विभाग में शिफ्ट करना बेहद आवश्यक होता है। इसके लिए अस्पताल में विशेष रूप से नियुक्त कर्मचारी (वार्ड बॉय/स्ट्रेचर स्टाफ) मौजूद रहते हैं, जिनका काम ही मरीजों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करना होता है। लेकिन घाटी हॉस्पिटल में इन विशेष कर्मचारियों का काम सुरक्षा गार्डों से कराया जा रहा है, जो न तो इसके लिए प्रशिक्षित हैं और न ही यह उनकी जिम्मेदारी है।
एंबुलेंस से मरीज आने के बाद भी, नियुक्त कर्मचारियों द्वारा स्ट्रेचर सेवा का सही उपयोग नहीं किया जा रहा। इसके बजाय सुरक्षा गार्डों से ही मरीजों को स्ट्रेचर पर उठवाकर अंदर ले जाया जा रहा है। इस तरह की लापरवाही से मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है, क्योंकि बिना चिकित्सकीय प्रशिक्षण के इस तरह का संवेदनशील कार्य करना जोखिम भरा है।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने इस पर तीखी नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को समय पर और सुरक्षित उपचार मिलना चाहिए, लेकिन इस तरह की लापरवाही सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे मामले पर घाटी हॉस्पिटल के प्रभारी अधिकारियों का ध्यान नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद उनका सही उपयोग नहीं हो रहा, जिसके कारण यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई है।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। साथ ही इमरजेंसी विभाग की व्यवस्था में सुधार करने की भी आवश्यकता जताई जा रही है।
अब सवाल यह है—आखिर मरीजों की जान से हो रहा यह खिलवाड़ कब रुकेगा? रोज ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन घाटी हॉस्पिटल प्रशासन पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। मरीजों की सुरक्षा और जीवन के साथ हो रही इस लापरवाही पर अब सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।
