बागेश्वर धाम में महिलाओं की एम्बुलेंस किडनैपिंग? धमकी, रोती चीखती आवाजें और साजिश का खुलासा!
पवित्र धाम में अपवित्र साजिश? बागेश्वर धाम की सेवादार पर 13 महिलाओं को अगवा करने का आरोप

छतरपुर, मध्य प्रदेश— देशभर में प्रसिद्ध बागेश्वर धाम एक बार फिर विवादों की भट्टी में झुलस रहा है। इस बार मामला मानवाधिकार, महिला सुरक्षा और धार्मिक प्रतिष्ठानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सोमवार रात छतरपुर जिले के लवकुशनगर थाना क्षेत्र में एक एम्बुलेंस से 13 डरी-सहमी महिलाओं को जबरन ले जाने का मामला सामने आया है। डायल 100 की त्वरित कार्रवाई में एम्बुलेंस को पठा चौकी क्षेत्र में रोका गया और महिलाओं को सुरक्षित थाने लाया गया।
वायरल वीडियो ने खोली सच्चाई की परतें
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें महिलाएं बागेश्वर धाम के सेवादारों पर गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही हैं। महिलाओं ने बताया कि उन्हें रात में बाल पकड़कर एम्बुलेंस में ठूंसा गया और महोबा रेलवे स्टेशन ले जाने की धमकी दी गई। एक युवती ने रोते हुए कहा, “अगर हम नहीं मानते तो हमें काटकर फेंक देने की धमकी दी गई थी। हम सिर्फ दर्शन और पेशी के लिए धाम आए थे।”
पुलिस जांच में उलझता जा रहा मामला
पुलिस पूछताछ में एम्बुलेंस ड्राइवर ने बताया कि उसे पन्ना निवासी “कल्लू दादा” नामक सेवादार ने इन महिलाओं को स्टेशन छोड़ने के लिए कहा था। वहीं, सेवादारों का दावा है कि महिलाएं धाम में चोरी जैसी गतिविधियों में लिप्त थीं और उन्हें वहां से हटाया जा रहा था। लेकिन पुलिस को अब तक इस दावे के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। लवकुशनगर थाना प्रभारी का कहना है, “महिलाओं को जबरन ले जाना कानूनन अपराध है। अगर चोरी का आरोप था तो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।”
महिलाओं के आरोप: डर, धमकी और अज्ञात मंज़िल
महिलाओं ने बयान में कहा कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। सिर्फ यही कहा गया कि “महोबा स्टेशन चलो, वरना अंजाम भुगतना पड़ेगा।” कुछ ने यह भी आरोप लगाया कि उनका सामान जबरन एम्बुलेंस में रखा गया और विरोध करने पर मारपीट की गई।
बागेश्वर धाम पर पहले भी लग चुके हैं सवाल
बागेश्वर धाम और उसके प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री पहले भी विवादों में रहे हैं।
- 2 जुलाई 2025 को आरती के दौरान टेंट गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
- 8 जुलाई 2025 को धर्मशाला की दीवार गिरने से एक महिला की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए थे।
- इसके अलावा धीरेंद्र शास्त्री पर “माइंड रीडिंग” और “भूत-प्रेत से छुटकारा” दिलाने जैसे दावों को लेकर अंधविश्वास फैलाने के आरोप भी लगते रहे हैं।
प्रशासन सख्त, जांच जारी
पुलिस ने एम्बुलेंस ड्राइवर और कुछ सेवादारों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। छतरपुर एसपी ने कहा, “यह मामला बेहद संवेदनशील है। जांच में अगर महिलाओं के आरोप सही पाए गए तो बागेश्वर धाम प्रबंधन पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” पुलिस ने धाम प्रशासन से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा है।
निष्कर्ष: धर्म के नाम पर मानवाधिकारों का उल्लंघन?
इस घटना ने बागेश्वर धाम की कार्यप्रणाली, सेवादारों के आचरण और धार्मिक संस्थानों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। क्या श्रद्धा के नाम पर महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य है? क्या धार्मिक प्रतिष्ठानों को कानून से ऊपर समझा जा सकता है?
अब पूरा देश इस मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।
