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इम्तियाज जलील द्वारा पेश किए गए दस्तावेज फर्जी, रमाई आवास योजना मामले में संपत्ति कर रसीदें बोगस होने का खुलासा

औरंगाबाद/प्रतिनिधि 

रमाई आवास योजना में घोटाला होने का आरोप लगाते हुए पूर्व सांसद इम्तियाज जलील द्वारा प्रस्तुत की गई संपत्ति कर की रसीदें फर्जी होने का मामला सामने आया है। शहर में ऐसे किसी प्रकार के संपत्ति क्रमांक मौजूद नहीं हैं, यह जानकारी महानगरपालिका के उपायुक्त तथा कर मूल्य निर्धारक विलास नवाळे ने दी।

पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने गुरुवार को शहर में रमाई आवास योजना में बड़े पैमाने पर घोटाला होने का आरोप लगाया था। आरोप लगाते समय उन्होंने विभिन्न दस्तावेज और कथित प्रमाण भी मीडिया के सामने प्रस्तुत किए थे। उनका दावा था कि इस योजना के तहत घर प्राप्त करने के लिए दाखिल किए गए प्रस्तावों के साथ मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम के राशन कार्ड, आय प्रमाणपत्र तथा संपत्ति कर की रसीद जैसे दस्तावेज लगाए गए हैं।

इन आरोपों को लेकर आज (13 तारीख) जिले सहित राज्यभर में चर्चा होती रही। जिन नगरसेवकों के नाम लेकर इम्तियाज जलील ने आरोप लगाए थे, उन्होंने भी इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

इस संबंध में उपायुक्त विलास नवाळे ने बताया कि महानगरपालिका की संपत्ति कर रसीद पर संपत्ति क्रमांक दर्ज करते समय पहले संबंधित जोन का नाम और उसके बाद उस जोन में मौजूद संपत्तियों की संख्या दर्शाई जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महानगरपालिका का “आर” नाम से कोई भी जोन नहीं है और “आर 08549845” जैसा कोई संपत्ति क्रमांक शहर में मौजूद नहीं है। इसी प्रकार “ई 98545869” नंबर की रसीद भी फर्जी है। महानगरपालिका का “ई” जोन जरूर है, लेकिन शहर में इतनी संख्या में संपत्तियां भी नहीं हैं।

देवेंद्र गंगाधरराव फडणवीस के नाम पर दिखाई गई संपत्ति कर रसीद में पता राहुल नगर, सादत नगर दर्शाया गया है और संपत्ति क्रमांक “आर 08549845” दर्ज किया गया है। इसमें 1 अप्रैल 2025 से 31 जून 2026 की अवधि के लिए कुल देय कर राशि 1985 रुपये बताई गई है।

वहीं एकनाथ संभाजी शिंदे के नाम की रसीद में पता आंबेडकर नगर दर्शाया गया है और संपत्ति क्रमांक “ई 98545869” दर्ज किया गया है। इसमें 4 जून 2025 से 31 जून 2026 की अवधि के लिए संपत्ति कर की चालू मांग 1985 रुपये दिखाई गई है।

इस पूरे मामले से यह सामने आया है कि रमाई आवास योजना के कथित घोटाले के संबंध में इम्तियाज जलील द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज और प्रमाण फर्जी हैं। अब यह दस्तावेज आखिर किसने तैयार किए और इसके पीछे कौन मास्टरमाइंड है, यह जांच का विषय बन गया है।

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