सऊदी अरब में घोषित हुई ईद-उल-अजहा की तारीख, भारत में कब मनाई जाएगी बकरीद?

नई दिल्ली: इस्लाम धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाने वाली ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व इस वर्ष 6 जून को मनाया जाएगा। सऊदी अरब में मंगलवार, 27 मई को बकरीद का चांद नजर आया, जिसके बाद वहां की सुप्रीम कोर्ट ने आधिकारिक रूप से ईद-उल-अजहा की तारीख घोषित की। मक्का में हज यात्रा 4 जून से आरंभ होगी, अरफा का दिन 5 जून को होगा और 6 जून को ईद-उल-अजहा पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी।
भारत समेत दुनिया भर के मुसलमान इस दिन को गहरी आस्था और समर्पण के साथ मनाते हैं। इसे ईद उल-जुहा, कुर्बानी की ईद या बकरीद के नाम से भी जाना जाता है।
क्या है बकरीद का महत्व?
ईद-उल-अजहा केवल कुर्बानी का पर्व नहीं, बल्कि यह अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और इंसानियत की भावना का प्रतीक है। इस दिन मुसलमान हज़रत इब्राहीम की उस ऐतिहासिक घटना को याद करते हैं जब उन्होंने अल्लाह के आदेश पर अपने प्रिय पुत्र की कुर्बानी देने का निश्चय किया था।
कहानी के अनुसार, जब हज़रत इब्राहीम अपने बेटे की कुर्बानी देने ही वाले थे, तभी अल्लाह ने उनकी परीक्षा पूरी मानते हुए उनके पुत्र को जीवनदान दिया और उसकी जगह एक जानवर की कुर्बानी हुई। तभी से इस परंपरा की शुरुआत हुई और आज भी बकरीद पर इसी श्रद्धा से कुर्बानी दी जाती है।
कुर्बानी की परंपरा और वितरण का नियम
बकरीद पर कुर्बानी के लिए आमतौर पर बकरे, भेड़ या अन्य हलाल जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इस कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है — एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाता है, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों में बांटा जाता है, जबकि तीसरा हिस्सा अपने घर के लिए रखा जाता है।
इस त्यौहार का उद्देश्य समाज में समानता, भाईचारा और जरूरतमंदों की सेवा की भावना को बढ़ावा देना है।
देशभर में ईद-उल-अजहा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और मुस्लिम समाज श्रद्धा के साथ इस विशेष दिन का इंतजार कर रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो।
