मुताह निकाह या जिस्म का सौदा? हैदराबाद में लड़कियों की शेखों को बोली लगाकर बिक्री, माँ-बाप भी दलाल बन बैठे!
कार्यकारी संपादक सय्यद फेरोज़ आशिक की विशेष रिपोर्ट

“मुताह निकाह” या इंसानियत का सौदा? – हैदराबाद से एक कड़वी सच्चाई
हैदराबाद की गलियों में एक अमानवीय खेल खेला जा रहा है। इसे नाम दिया गया है “मुताह निकाह” — लेकिन असल में यह नाम नहीं, धोखे, लालच और शोषण की एक साज़िश है। यहां गरीब घरों की नाबालिग लड़कियों को अरब देशों के शेखों के हाथ कुछ पैसों में “निकाह” के नाम पर सौंप दिया जाता है — सिर्फ कुछ दिन के लिए।
इन शेखों के लिए ये लड़कियाँ एक अस्थायी मनोरंजन हैं, और घरवालों के लिए एक मोटी रकम की उम्मीद।
शोषण की पूरी मशीनरी तैयार है
इन निकाहों को कराने के लिए ब्रोकर, एजेंट, होटल मालिक, और यहां तक कि कुछ लालची मौलवी भी शामिल हैं। इनका काम है “ग्राहक” यानी शेख को लड़की दिखाना, उसके ‘वर्जिनिटी सर्टिफिकेट’ तैयार कराना और फिर तय रकम लेकर निकाह पढ़वाना।
शेख मेडिकल या टूरिस्ट वीजा पर भारत आता है, लड़की को होटल या घर में कुछ दिन रखता है और फिर वापस चला जाता है — लड़की गर्भवती हुई तो ज़िंदगी भर का बोझ छोड़ जाता है।
शबाना की कहानी – मासूमियत का मोल
रिपोर्ट में शबाना (काल्पनिक नाम) की कहानी ने रूह कंपा दी। पहली बार पीरियड शुरू होते ही घरवालों ने उसका निकाह एक अधेड़ शेख से करा दिया। वो “शेख अंकल” कुछ दिन शबाना के साथ होटल में रहे — नाबालिग होने के बावजूद। कुछ समय बाद शबाना गर्भवती हुई, जान को खतरा था, गर्भ गिरा नहीं सके। परिवार ने उसे कमरे में बंद कर दिया। आज वह अपनी बेटी को ‘बेटी’ नहीं, ‘बहन’ कहने को मजबूर है — क्योंकि अब्बा को समाज की शर्म और मज़हबी इज्ज़त प्यारी है।
कानून और मज़हब दोनों के खिलाफ
सबसे ज़रूरी बात – मुताह निकाह की इस्लाम में कोई मान्यता नहीं है। यह सिर्फ एक कारोबारी जुगाड़ है, जिसे कुछ लालची मुफ्ती, एजेंट और मौलवी मिलकर “धर्म” की आड़ में चला रहे हैं।
इस्लाम में विवाह एक पवित्र बंधन है — व्यापार नहीं। यह निकाह नहीं, बल्कि एक संगठित देह व्यापार है जिसे धर्म की चादर ओढ़ा दी गई है।
पुलिस और सरकार की नज़रबंदी जरूरी
ज़रूरत है कि पुलिस, महिला आयोग और सरकार ऐसे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करें। ब्रोकर, एजेंट, और तथाकथित मौलवियों पर गैंगस्टर एक्ट या मानव तस्करी की धाराओं में केस दर्ज हों। साथ ही, धर्मगुरुओं को भी सामने आकर कहना चाहिए — कि मुताह निकाह इस्लाम नहीं, इंसानियत के खिलाफ गुनाह है।
✊ समाज को जगाने की ज़रूरत है।
आज एक शबाना बिक रही है, कल आपकी पहचान की कोई लड़की भी इस जाल में फंस सकती है। अब समय है इन साजिशों को उजागर करने का — क्योंकि चुप रहना भी अपराध है।
