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पाखंडी तांत्रिक की दरिंदगी: तंत्र क्रिया के नाम पर दो मासूमों की गला दबाकर हत्या, पुलिस की लापरवाही से उजागर हुआ सनसनीखेज मामला

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। सरधना थाना क्षेत्र के नवाबगढ़ी गांव में खुद को तांत्रिक बताने वाले असद नामक व्यक्ति ने तंत्र क्रिया के लिए दो मासूम बच्चों की बेरहमी से गला दबाकर हत्या कर दी। इस दोहरे हत्याकांड ने पुलिस की लापरवाही और संवेदनहीनता की पोल भी खोल दी है।

पुलिस ने आरोपी असद को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आरोपी के पिता इकरामुद्दीन और भाई जुबैर से भी पूछताछ जारी है। एसपी देहात राकेश मिश्रा ने बताया कि पूछताछ में असद ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया है।

उवैश की हत्या के बाद सामने आई पूरी सच्चाई

घटना का खुलासा तब हुआ जब गुरुवार को नमाज पढ़ने निकला 14 वर्षीय उवैश देर रात तक घर नहीं लौटा। परिजनों ने तलाश शुरू की, तभी उवैश के पिता के मोबाइल पर एक QR कोड के साथ 5 लाख रुपये फिरौती की मांग का मैसेज आया। उन्होंने 5 हजार रुपये ट्रांसफर करने के बाद पुलिस को सूचना दी।

शनिवार को पुलिस की सर्विलांस टीम ने गांव के ही एक जर्जर मकान से उवैश का शव बरामद किया। पूछताछ में आरोपी असद ने तंत्र क्रिया के लिए उवैश की हत्या करने की बात कबूली। इसके बाद उसने यह भी खुलासा किया कि तीन महीने पहले उसने 11 वर्षीय रिहान की भी इसी तरह हत्या की थी। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर खेत से रिहान के कपड़े और कंकाल के अवशेष बरामद किए।

पहले भी जताया गया था शक, लेकिन पुलिस ने नजरअंदाज किया

रिहान की मां फरहाना ने 3 अप्रैल को बेटे की गुमशुदगी के बाद सीधे तांत्रिक असद पर शक जताते हुए पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने इसे प्रेम प्रसंग का मामला बताते हुए अनदेखा कर दिया। यहां तक कि जब उवैश की हत्या के बाद पुलिस ने असद के घर की तलाशी ली, तो वहां से रिहान के कपड़े और बाल बरामद हुए, जो तंत्र क्रिया के सबूत थे।

उवैश के पिता ने भी बताया था कि रिहान को आखिरी बार असद के साथ देखा गया था, लेकिन पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इस लापरवाही की कीमत एक और मासूम की जान से चुकानी पड़ी।

यह दिल दहला देने वाला मामला न सिर्फ समाज को झकझोरता है, बल्कि पुलिस की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि दोषियों को कितनी जल्दी और कड़ी सजा मिलती है और क्या सिस्टम अपनी भूलों से सबक लेता है।

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