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एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाएंगे अंबादास दानवे? विदाई भाषण से उठे सियासी सवाल

महाराष्ट्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे के हालिया बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। अपने कार्यकाल के अंतिम क्षणों में दानवे ने शिवसेना के दोनों गुटों को एक होने की अपील की और पार्टी में हुई टूट को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। लेकिन उनके इस बयान को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल, दानवे का कार्यकाल 15 अगस्त को समाप्त हो रहा है और मौजूदा संख्या बल के आधार पर उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) से उनका दोबारा विधान परिषद में जाना आसान नहीं दिख रहा। ऐसे में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि दानवे अब पाला बदल सकते हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

एक समारोह में बोलते हुए दानवे ने कहा, “हम सत्ता के लिए पैदा नहीं हुए हैं। सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन संगठन की एकता सबसे बड़ी ताकत होती है।” उन्होंने कहा कि शिवसेना को किसी की नजर लग गई और संगठन बिखर गया, यह घाव अब भरना चाहिए।

उनके इस बयान ने यह संकेत दिया कि वे पार्टी की पुरानी एकता और मूल भावना को दोबारा जीवित देखना चाहते हैं। उन्होंने संस्कृति की लोकोक्ति ‘संघे शक्ति कलियुगे’ का भी उल्लेख किया, जिससे साफ है कि वे राजनीतिक रूप से कुछ बड़ा संकेत दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दानवे की यह भावुक अपील कहीं न कहीं उनके भविष्य की सियासी दिशा को लेकर बड़ा संकेत है। वे चाहे अब भी उद्धव ठाकरे के वफादार हों, लेकिन दोबारा सत्ता की मुख्यधारा में आने के लिए शिंदे गुट की राह पकड़ सकते हैं।

2022 में शिवसेना में फूट पड़ने के बाद एकनाथ शिंदे ने 39 विधायकों के साथ बगावत कर दी थी और अब वे उपमुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं। दानवे ने कहा कि वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संगठन की आत्मा एक रहनी चाहिए।

अपने भाषण में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि शिवसेना फिर से एक मजबूत संगठन के रूप में खड़ी हो। परंतु यह अपील ऐसे वक्त में करना, जब खुद उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला है, कई राजनीतिक संकेतों की ओर इशारा कर रहा है।

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