‘लाडकी बहन’ योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: 14,000 पुरुषों ने उठाया महिलाओं की योजना का लाभ, विपक्ष ने की CBI जांच की मांग

मुंबई: महाराष्ट्र की बहुचर्चित लाडकी बहन योजना अब भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। एनसीपी (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले द्वारा भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाए जाने के बाद राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने खुद स्वीकार किया है कि इस योजना के तहत हजारों पुरुषों ने गलत तरीके से लाभ उठाया है।
अजित पवार ने कहा, “जिन लोगों ने इस योजना का गलत फायदा उठाया है, उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
14,298 पुरुषों ने महिला बनकर लिया लाभ
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा हाल ही में कराए गए एक ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 14,298 पुरुषों ने खुद को महिला दिखाकर फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए योजना में रजिस्ट्रेशन कराया और सरकारी सहायता की राशि प्राप्त की। इससे राज्य को 21.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इस अनियमितता के चलते सरकार को 26.34 लाख खातों में राशि का वितरण रोकना पड़ा है। ऑडिट में अन्य कई गड़बड़ियों की भी पुष्टि हुई है, जिससे प्रशासन और योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
विपक्ष ने बोला हमला, सीबीआई जांच की मांग
एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, “सरकार तो छोटी-छोटी बातों पर भी ईडी और सीबीआई को भेज देती है, लेकिन अब जब 21 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है, तो इसे क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है? सरकार को तुरंत यह बताना चाहिए कि इन फर्जी लाभार्थियों को योजना में शामिल करने वाला ठेकेदार कौन है।”
क्या है लाडकी बहन योजना?
लाडकी बहन योजना महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2024 विधानसभा चुनाव से पूर्व शुरू की गई एक प्रमुख सामाजिक योजना है। इसके तहत उन महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की सहायता दी जाती है जिनकी सालाना पारिवारिक आय ₹2.5 लाख से कम है। यह योजना ग्रामीण और गरीब तबके की महिलाओं को आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी और चुनावों में महायुति गठबंधन को इसका बड़ा राजनीतिक लाभ भी मिला।
सरकार की साख पर सवाल
इस खुलासे के बाद महायुति सरकार की ईमानदारी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने फर्जीवाड़ा स्वीकार कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे एक संगठित घोटाले के रूप में देख रहा है और मामले की गहराई से जांच की मांग कर रहा है।
फिलहाल, जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार दोषियों को सचमुच सज़ा दिला पाएगी या यह मामला भी बाकी घोटालों की तरह दबा दिया जाएगा।
