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औरंगाबाद से लापता महिला केस में नया मोड़, पुणे में तीन युवतियों को पुलिस पर जातिसूचक गाली और मारपीट के गंभीर आरोप

पुणे/औरंगाबाद: पुणे के कोथरूड इलाके में तीन युवतियों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित मारपीट और जातिसूचक गालीगलौज का मामला सामने आया है, जो मूलतः औरंगाबाद में दर्ज एक मिसिंग शिकायत से जुड़ा है।

दरअसल, औरंगाबाद जिले की एक 23 वर्षीय विवाहित महिला अपने पति द्वारा लगातार किए जा रहे मानसिक और शारीरिक शोषण से तंग आकर पुणे आ गई थी। यहां तीन युवतियों ने उसकी मदद की और उसे रहने के लिए सहारा दिया। महिला के लापता होने पर औरंगाबाद में एक मिसिंग शिकायत दर्ज की गई थी।

जैसे ही औरंगाबाद पुलिस ने महिला का लोकेशन कोथरूड, पुणे में ट्रेस किया, स्थानीय पुलिस को बिना कोई सूचना दिए सीधे पुणे पहुंचकर तीनों युवतियों को हिरासत में ले लिया। आरोप है कि कोथरूड पुलिस स्टेशन की PSI प्रेमा पाटील, औरंगाबाद पुलिस स्टेशन के अमोल कामटे और महिला कॉन्स्टेबल संजीवनी शिंदे ने युवतियों के साथ न सिर्फ मारपीट की, बल्कि उन्हें जातिसूचक गालियाँ दीं और लैंगिक रूप से अपमानित किया।

पीड़ितों का आरोप है कि PSI प्रेमा पाटील ने उन्हें कहा – “तुम महार-मांग जाति की हो, तो ऐसा ही बर्ताव करोगी। तुम वाया जाओगी, तुम्हारी जाति ऐसी ही है,” और साथ ही अभद्र शब्दों का प्रयोग किया। PSI कामटे पर भी मारपीट और एक युवती से अनुचित स्पर्श करने का आरोप है। इतना ही नहीं, युवतियों के पहनावे और व्यवहार को लेकर भी अपमानजनक टिप्पणी की गई।

इस घटना के बाद तीनों पीड़ित युवतियां न्याय के लिए पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी हैं। उनका कहना है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगी। इस आंदोलन को अब पुणे के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन भी मिल रहा है।

पुलिस उपायुक्त संभाजी कदम ने बयान दिया है कि यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार और उपायुक्त संभाजी कदम इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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