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कांवरियों के जत्थे पर हाईटेंशन तार गिरा: 7 की मौके पर मौत, कई झुलसे; लापरवाही पर भड़की जनता, सीएम ने जताया शोक

भागलपुर (बिहार): देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए जल भरने जा रहे कांवरियों के एक जत्थे के साथ सोमवार देर रात भीषण हादसा हो गया। शाहकुंड-सुल्तानगंज मुख्य मार्ग पर हाईटेंशन तार की चपेट में आने से सात कांवरियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद इलाके में मातम के साथ आक्रोश भी गहराता जा रहा है।

हादसा कैसे हुआ?

जानकारी के अनुसार, कांवरियों का जत्था शाहकुंड से सुल्तानगंज की ओर जल भरने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में अचानक एक झूलता हुआ हाईटेंशन तार जुलूस के संपर्क में आ गया। तेज करंट की चपेट में आने से सात कांवरियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य झुलस कर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।

लापरवाही से गई सात ज़िंदगियां?

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने हादसे के लिए बिजली विभाग की घोर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। लोगों का आरोप है कि उक्त हाईटेंशन तार पहले से ही काफी नीचे लटका हुआ था, जिसकी कई बार शिकायत भी की गई थी, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

प्रशासन की कार्रवाई, लेकिन जवाब नहीं

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और बिजली विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू की गई है। हालांकि, अब तक किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है, जिससे जनता का आक्रोश और बढ़ता जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जताया दुख, ₹5 लाख मुआवज़े का ऐलान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों को बेहतर इलाज देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है,
“यह बेहद दुखद और हृदयविदारक हादसा है। सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

कांवर यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

हर साल लाखों श्रद्धालु कांवर यात्रा के तहत सुल्तानगंज से जल लेकर देवघर तक का सफर तय करते हैं। ऐसे में इस तरह की दुर्घटनाएं न केवल दुखद हैं, बल्कि प्रशासन की तैयारियों और सतर्कता पर भी सवाल खड़े करती हैं।

  • क्यों नहीं होती हाईटेंशन तारों की समय पर समीक्षा?
  • क्यों नहीं होती ऐसी धार्मिक यात्राओं के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था?

सड़कों पर उतरे लोग, प्रदर्शन तेज

हादसे के बाद से ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। बिजली विभाग और प्रशासन के खिलाफ लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी। कई जगहों पर पथराव और तोड़फोड़ की भी खबरें हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि संबंधित अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और कड़ी कार्रवाई हो।


यह हादसा न केवल सात निर्दोष श्रद्धालुओं की जान ले गया, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता और धार्मिक यात्राओं के प्रति लापरवाही की पोल भी खोल गया है। अब देखना यह होगा कि क्या यह हादसा भी कागज़ी कार्रवाई में सिमट कर रह जाएगा, या दोषियों को वाकई सज़ा मिलेगी।

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