अंधविश्वास की आड़ में हैवानियत: औरंगाबाद में बाबा बना दरिंदा, पेशाब पिलाया, जूते मुंह में ठूंसे, महिलाएं भी बनीं शिकार

औरंगाबाद जिले के वैजापुर तहसील के शिउर गांव से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहां संजय पगारे नाम का एक स्वयंभू ‘बाबा’ आध्यात्मिक उपचार की आड़ में ग्रामीणों पर अमानवीय अत्याचार करता रहा। मंदिर से चल रहे उसके ढोंगी तंत्र में दो साल से डर, धोखा और दरिंदगी का खेल चल रहा था।
पगारे ने दावा किया था कि उसके पास अदृश्य शक्तियां हैं, वह बुरी आत्माओं को भगा सकता है, विवाह और संतान का उपाय कर सकता है। लेकिन उसकी असली हकीकत एक स्टिंग ऑपरेशन में बेनकाब हुई, जिसमें कैमरे में कैद हुईं इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटनाएं।
पेशाब पिलाया, जूते मुंह में ठूंसे, लाठी से पीटा
वीडियो में बाबा अपने अनुयायियों को लाठियों से पीटते, उन्हें जबरन मंदिर के चारों ओर दौड़ाते, और मुंह में अपने जूते ठूंसते हुए नजर आया। कई लोगों को पेड़ के पत्ते खिलाए गए, और कुछ को तो अपना पेशाब पीने के लिए मजबूर किया गया।
महिलाएं भी बनीं दरिंदगी की शिकार
एक वीडियो में पगारे महिलाओं समेत कई ग्रामीणों पर लंबी छड़ी से प्रहार करते हुए दिखा। उनका दावा था कि यह ‘आध्यात्मिक शुद्धिकरण’ है। बाबा की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी — एक आदमी को जमीन पर लेटा देखकर उसके चेहरे पर पैर रखे, पीला पाउडर फेंका और ढोल बजाकर तंत्र अनुष्ठान किया गया।
FIR दर्ज, पुलिस जांच में जुटी
स्टिंग ऑपरेशन की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई और संजय पगारे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में केस दर्ज किया गया। उस पर धोखाधड़ी, मारपीट, और अंधविश्वास फैलाने जैसे गंभीर आरोप हैं।
FAQ:
सवाल: महाराष्ट्र में अंधविश्वास के नाम पर इलाज या हिंसा करने पर क्या सजा है?
जवाब: 7 साल तक की जेल और ₹5,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
सवाल: अगर कोई अंधविश्वास के खिलाफ शिकायत करना चाहे, तो कहां करें?
जवाब: नजदीकी पुलिस स्टेशन में सीधे FIR दर्ज कराएं।
यह मामला न सिर्फ कानून के लिए बल्कि समाज की चेतना के लिए भी एक चेतावनी है कि अंधविश्वास के नाम पर किसी को भी असीमित अधिकार नहीं दिए जा सकते।