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डिग्री नहीं दिखाते, लेकिन नागरिकता का सबूत मांगते हैं – असदुद्दीन ओवैसी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी डिग्री दिखाने की खुली चुनौती देते हुए कहा कि जो खुद अपनी डिग्री नहीं दिखा सकते, वे देश के मुसलमानों, दलितों और आदिवासियों से नागरिकता का सबूत मांग रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि सरकार का असली एजेंडा गरीबों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों को उनके अधिकारों से वंचित करना है। उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके पूर्वजों ने देश के लिए बलिदान दिया, वे आज नागरिकता साबित करने को मजबूर हैं, जबकि जिन लोगों ने आज़ादी की लड़ाई में भाग नहीं लिया, वे सत्ता में बैठे हैं।

उन्होंने वक्फ कानून को भी मुस्लिम विरोधी करार दिया और कहा कि यह कानून मुसलमानों की संपत्तियों की रक्षा नहीं करता, बल्कि उन्हें सरकारी नियंत्रण में ले जाकर उनके अधिकारों का हनन करता है।

ओवैसी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत को असली खतरा चीन और पाकिस्तान से है, लेकिन सरकार का ध्यान मुसलमानों के घर गिराने और उनके अधिकार छीनने में है। उन्होंने लोगों से मतदाता सूची में अपने नाम की जांच करने और सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखने की अपील की।

अपने भाषण में ओवैसी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर रील्स देखने में समय न गंवाएं बल्कि पढ़ाई करें, समाचार पढ़ें और उर्दू में लिखी खबरों को समझें। उन्होंने कहा कि एक-दो मिनट की वीडियो देखकर कोई साइंटिस्ट नहीं बन सकता, उसके लिए मेहनत करनी होती है।

अंत में ओवैसी ने दोहराया कि उनकी पार्टी AIMIM संविधान के दायरे में रहकर अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़े वर्गों के हकों की लड़ाई हमेशा लड़ती रहेगी।

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