अंबड में जालसाजी का बड़ा खुलासा — सहकारी संस्था के नाम पर फर्जी दस्तावेजों से जमीन के सौदे, कई आरोपी गिरफ्तार

जालना/कादरी हुसैन
जालना जिले के अंबड पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक संगठित जालसाजी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सहकारी संस्था की आड़ में फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान पत्रों के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन को अंजाम दिया। इस घोटाले में फर्जी सदस्य पंजीकरण, जाली हस्ताक्षर और आधार सत्यापन प्रणाली के दुरुपयोग का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
पुलिस जांच के अनुसार, कुछ व्यक्तियों ने आपसी मिलीभगत से एक सहकारी संस्था के नाम पर फर्जी सदस्यता तैयार की, और उन काल्पनिक सदस्यों के नाम से भूमि खरीद-बिक्री के सौदे दिखाए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने डिजिटल सिग्नेचर और ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली में भी हेरफेर की थी।
इस प्रकरण में शिकायतकर्ता प्रविण माणिकचंद राठोड़ (42 वर्ष), जो सहायक उप-पंजीयक, पंजीकरण एवं मुद्रांक कार्यालय, अंबड में कार्यरत हैं, की शिकायत पर दिनांक 5 नवंबर 2025 को मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) की धारा 318(4), 336(2), 336(3), 3(5), भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 की धारा 82, और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66(C) के तहत अपराध दर्ज है।
जांच में पुलिस को आरोपियों के पास से फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान पत्र, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत मिले हैं। इन सभी साक्ष्यों को जब्त कर विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस रैकेट के कुछ मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। आरोपियों ने जिन डिजिटल माध्यमों और दस्तावेजों का उपयोग किया, उनकी तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है।
यह पूरा मामला गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। अंबड पुलिस स्टेशन की विशेष जांच टीम इस गिरोह के सभी सदस्यों, उनके वित्तीय स्रोतों और दस्तावेजी जालसाजी के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
इस प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक अजय कुमार बंसल, अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी, तथा उपविभागीय पुलिस अधिकारी सिद्धेश्वर धुमाल के मार्गदर्शन में अंबड पुलिस निरीक्षक संतोष घोडके और उनकी टीम द्वारा की जा रही है।
