पाँच सौ वर्ष पुरानी सूफ़ी विरासत का पुनर्जागरण — डॉ. मोहम्मद एजाज़ मनशाद ने फ़ारसी ग्रंथ “मख़ज़न-ए-अदइया” को आधुनिक रूप में किया प्रकाशित

जालना/औरंगाबाद : कादरी हुसैन
सूफ़ी परंपरा की प्राचीन आध्यात्मिक धरोहर को नया जीवन देते हुए डॉ. मोहम्मद एजाज़ मोहम्मद मनशाद ने लगभग पाँच सौ वर्ष पुराने अत्यंत दुर्लभ फ़ारसी ग्रंथ “मख़ज़न-ए-अदइया” को शोधपूर्ण परिश्रम के बाद प्रकाशित कर दिया है। यह ग्रंथ उनके परिवार में सदियों से एक पवित्र अमानत के रूप में संरक्षित रहा है, जिसे पहली बार आधुनिक काल में व्यवस्थित रूप से पाठकों के सामने लाया गया है।
ग्रंथ की मूल रचना और अनुवाद
इस अमूल्य ग्रंथ की रचना सूफ़ी इस्माइल फरही ने अपने पीर हज़रत ईसा मसूह ओलिया जिंदुल्लाह की मार्गदर्शन में की थी। उर्दू अनुवाद प्रतिष्ठित विद्वान शेख़ फ़िरोज़ अब्दुल हकीम (वरिष्ठ शिक्षक) ने किया — जो अपने 85 वर्ष की आयु में भी फ़ारसी के पुराने लिपि-पद्धति, कठिन शब्दावली और अरबी दुआओं के विस्तृत संग्रह को पूरी निष्ठा और सटीकता से आधुनिक पाठकों तक पहुँचाने में सफल रहे।
डॉ. मनशाद बताते हैं कि कई विद्वानों ने इस जटिल पांडुलिपि का अनुवाद करने से हाथ खींच लिए थे, लेकिन एक संयोगपूर्ण मुलाक़ात में इस्लाम दरवाज़ा (क़ट-काट गेट) के पास शेख़ फ़िरोज़ साहब से भेंट हुई और उन्होंने इस कठिन कार्य के लिए सहमति दी, जिसे परिवार ने ऐतिहासिक सौभाग्य माना।
परिवार की सदियों पुरानी आध्यात्मिक धरोहर
“मख़ज़न-ए-अदइया” पीढ़ियों से डॉ. मनशाद के परिवार में सुरक्षित रही पांडुलिपि है। यह अमानत उनके बुज़ुर्गों —
मुहम्मद शरीफ़,
मुहम्मद फ़सीहुल्लाह,
और हज़रत जान अल्लाह शाह क़ादरी (क़ुत्ब-ए-दक्कन)
—की आध्यात्मिक निशानी मानी जाती रही है। उनका पूरा शजरनामा वक़्फ़ बोर्ड में भी स्वीकृत है।
लंबे समय तक यह भ्रम बना रहा कि यह ग्रंथ हज़रत जान अल्लाह शाह या हज़रत मीरा जी सिद्दीकी की कृति है, लेकिन विस्तृत शोध से स्पष्ट हुआ कि इसके वास्तविक लेखक सूफ़ी इस्माइल फरही हैं।
418 पृष्ठों में समाई सूफ़ी साधना की गहराई
यह ग्रंथ सूफ़ी साधना, आध्यात्मिक विज्ञान और शरीअती–तरीक़ती रहस्यों का विस्तृत खजाना है। इसमें शामिल हैं—
• अज़ान, वज़ू और नमाज़ के नियम
• इस्तिखारा के तरीके और शरई मार्गदर्शन
• अस्मा-ए-अज़्म और उनके आध्यात्मिक प्रभाव
• ज़िक्र नासूती, मल्कूती, जबरूती, लाहूती की तफ़सील
• मुरक़बे और अशग़ाल (ध्यान साधनाएँ)
• सबअत-ए-क़लाह और ख़िर्क़ा के नियम
• पीर–मुरिद के आचार, दुआएँ और आध्यात्मिक आदाब
यह पुस्तक सूफ़ी साधकों, शोधकर्ताओं और आध्यात्मिक मार्ग में रुचि रखने वालों के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका मानी जा रही है।
तकनीकी संपादन और सहयोग
अरबी–फ़ारसी लफ़्ज़ों की बारीकियों को सुरक्षित रखते हुए पुस्तक का डीटीपी और तकनीकी संपादन डॉ. सैयद अशफ़ाक अली ने किया। उन्हें इस ग्रंथ का वास्तविक तकनीकी संयोजक बताया गया है।
प्रकाशन कार्य में हज़रत जान अल्लाह शाह क़ादरी के अनुयायियों ने भी उत्साहपूर्वक सहयोग दिया, जिनमें—
फारूकी अहमद, क़ादरी हुसैन मोहिउद्दीन (सज्जाद), अब्दुल सत्तार, डॉ. नवीद, मोहम्मद तोफ़ीक, प्रवीज़ सिद्दीकी, हकीम अब्दुल हमीद (अमेरिका)
तथा औरंगाबाद–खुल्दाबाद के अनेक शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्यप्रेमी शामिल हैं।
पुस्तक की उपलब्धता
यह ऐतिहासिक पुस्तक निम्न स्थानों पर उपलब्ध है—
• डॉ. मोहम्मद एजाज़ मोहम्मद मनशाद, राहत कॉलोनी, औरंगाबाद
• मिर्ज़ा ओल्ड बुक हाउस, जिंसियाँ, औरंगाबाद
• आलमगीर बुक डिपो, खुल्दाबाद
क़ीमत : ₹200
डॉ. मनशाद की विनम्र अपील
“यह ग्रंथ अत्यंत पुरानी फ़ारसी भाषा से अनुवादित है। यदि किसी पाठक को कोई त्रुटि मिले तो कृपया अवगत कराएँ। आगामी संस्करण को और बेहतर बनाने का प्रयास रहेगा।”
यह प्रकाशन न सिर्फ सूफ़ी साहित्य को नया जीवन देता है, बल्कि दक्खन की आध्यात्मिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचाने का महत्त्वपूर्ण कार्य भी करता है।
