खातून डॉक्टर का नक़ाब नोचने और भीड़ हिंसा में अतहर हुसैन की मौत ने बिहार सरकार का असली चेहरा उजागर किया: फेडरेशन ऑफ़ महाराष्ट्र मुस्लिम्स

जालना/कादरी हुसैन
बिहार में हालिया घटनाक्रमों को लेकर फेडरेशन ऑफ़ महाराष्ट्र मुस्लिम्स ने नीतीश कुमार की मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कथित सेकुलर छवि के पीछे छिपा असंवेदनशील और अन्यायपूर्ण चेहरा अब सामने आ चुका है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि नीतीश कुमार की सत्ता में वापसी के बाद कुछ समय के लिए यह उम्मीद जगी थी कि बिहार अन्य भाजपा-शासित राज्यों की तरह अराजकता और कानून-व्यवस्था की गिरावट का शिकार नहीं बनेगा, लेकिन हाल की घटनाओं ने इन उम्मीदों को पूरी तरह तोड़ दिया है।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने मीडिया के समक्ष बिहार से जुड़ी दो गंभीर और दुखद घटनाओं पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पहली घटना बिहार के नवादा जिले की है, जहां अतहर हुसैन नामक एक मुस्लिम व्यापारी को कथित रूप से हिंदू अतिवादी तत्वों ने सुनियोजित तरीके से भीड़ हिंसा का शिकार बनाया, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोप है कि जब परिजन न्याय की उम्मीद में पुलिस थाने पहुंचे, तो दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय मृतक अतहर हुसैन के खिलाफ ही चोरी का मामला दर्ज कर लिया गया।
दूसरी घटना को फेडरेशन ने और भी अधिक गंभीर बताया। एक सार्वजनिक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का नक़ाब नोचने की घटना को संगठन ने न केवल अनैतिक, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ करार दिया। फेडरेशन के अनुसार, जब इस तरह का कृत्य राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति से जुड़ा हो, तो यह पूरे शासन तंत्र पर सवाल खड़े करता है। संगठन ने कहा कि इन दोनों घटनाओं ने नीतीश कुमार के सेकुलरिज़्म के दावे को पूरी तरह बेनक़ाब कर दिया है।
फेडरेशन ऑफ़ महाराष्ट्र मुस्लिम्स ने दोनों घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की कि वे महिला डॉक्टर के साथ किए गए व्यवहार के लिए व्यक्तिगत रूप से सार्वजनिक माफ़ी माँगें और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दें, ताकि उस संवैधानिक पद की गरिमा बनी रहे।
संगठन ने अतहर हुसैन की भीड़ हिंसा में हुई मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए बिहार सरकार से मांग की कि हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार कर उनके खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, मृतक के परिजनों को मुआवज़े के तौर पर एक करोड़ रुपये प्रदान किए जाएँ।
फेडरेशन ने यह भी मांग की कि अतहर हुसैन को बदनाम करने के उद्देश्य से लगाए गए चोरी के कथित और मनगढ़ंत आरोपों को तुरंत रद्द किया जाए। पदाधिकारियों ने कहा कि देश में मुसलमानों की हत्या के बाद पीड़ितों पर ही झूठे मुक़दमे दर्ज करने का चलन खतरनाक है, जो न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि समाज में गहरी निराशा और असंतोष को जन्म देता है। इससे देश की शांति और कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
यह बयान फेडरेशन ऑफ़ महाराष्ट्र मुस्लिम्स की संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जारी किया गया। प्रेस विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर करने वालों में मौलाना उमरैन महफूज़ रहमानी, सेक्रेटरी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड; महमूद अहमद दरियाबादी, जनरल सेक्रेटरी उलेमा काउंसिल; मौलाना हाफ़िज़ इलियास ख़ान फलाही, अमीर-ए-हलक़ा जमाअत-ए-इस्लामी हिंद; मौलाना हाफ़िज़ सैयद अतहर, आलिम-ए-दीन अहले सुन्नत वल जमाअत एवं अध्यक्ष उलेमा एसोसिएशन मुंबई, महाराष्ट्र; मौलाना हलीमुल्लाह क़ासमी, अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिंद महाराष्ट्र; फ़रीद शेख, अध्यक्ष अमन कमेटी मुंबई; अब्दुल हफ़ीज़, पत्रकार जालना; मौलाना ज़हीर अब्बास रिज़वी, उपाध्यक्ष शिया पर्सनल लॉ बोर्ड; डॉ. सईद अहमद फ़ैज़ी, नाज़िम-ए-उमूमी जमीयत अहले हदीस महाराष्ट्र; हाफ़िज़ इक़बाल चूना वाला, रुक्न-ए-शूरा दारुल उलूम देवबंद वक़्फ़; मौलाना मुफ़्ती हुज़ैफ़ा क़ासमी, नाज़िम तंजीम जमीयत उलमा-ए-हिंद महाराष्ट्र; मौलाना आगा रूह ज़फ़र, इमाम ख़ोजा जमाअत मुंबई; मौलाना अनीस अशरफ़ी रज़ा, रज़ा फ़ाउंडेशन मुंबई; मुफ़्ती अशफ़ाक़ क़ासमी; मौलाना निज़ामुद्दीन फ़ख़रुद्दीन; मेंबर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, पुणे; हुमायूँ शेख, नाज़िम मुंबई जमाअत-ए-इस्लामी हिंद तथा शेख अब्दुल मजीब, कोऑर्डिनेटर फेडरेशन ऑफ़ महाराष्ट्र मुस्लिम्स शामिल हैं।
