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जालना में आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां: तहसील-पंचायत समिति परिसरों में राजनीतिक प्रचार, प्रशासन पर गंभीर सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता साद बिन मुबारक ने उठाए सवाल

जालना/कादरी हुसैन

नगर निगम चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद जालना शहर में सरकारी कार्यालय परिसरों के भीतर ही नियमों के उल्लंघन की गंभीर तस्वीर सामने आई है। बुधवार, 24 दिसंबर की दोपहर लगभग चार बजे प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील कार्यालय और पंचायत समिति जैसे प्रमुख सरकारी परिसरों में राजनीतिक नामों वाली संपत्ति और प्रचार सामग्री लगे वाहनों की मौजूदगी ने चुनाव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता साद बिन मुबारक ने कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं।

जालना तहसील कार्यालय के वेटिंग गार्डन में लगी सीमेंट की बेंच पर वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा जिला अध्यक्ष विजय लहाने का नाम, पद और पार्टी का उल्लेख स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार आचार संहिता की अवधि में सार्वजनिक संपत्ति पर इस तरह का राजनीतिक उल्लेख हटाना या ढकना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद जिस तहसील कार्यालय में चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा प्रशासनिक अमला कार्यरत रहता है, वहीं नियमों की अनदेखी होना चौंकाने वाला है।

इसी तरह पंचायत समिति कार्यालय के आंतरिक परिसर में भी वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा जिला अध्यक्ष विजय लहाने की दो स्कॉर्पियो गाड़ियां खड़ी पाई गईं। इन वाहनों की पिछली कांच पर बड़े राजनीतिक फोटो, पार्टी का चिन्ह और “युवा, दमदार नेतृत्व” जैसे प्रचारात्मक संदेश स्पष्ट रूप से नजर आए। सरकारी कार्यालय परिसर को निष्पक्ष और राजनीति से दूर रखा जाना अपेक्षित होता है, ऐसे में इस तरह की मौजूदगी प्रशासन की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

आचार संहिता के दौरान शहर में उड़नदस्तों द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ये दस्ते तहसील और पंचायत समिति जैसे संवेदनशील सरकारी परिसरों तक क्यों नहीं पहुंचे। जब सरकारी दीवारों से पोस्टर, बैनर और झंडे हटाए जा रहे हैं, तो फिर इन बेंचों और राजनीतिक प्रचार सामग्री लगे वाहनों को लेकर चुप्पी क्यों साधी गई—यह प्रश्न अब आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब देखना यह होगा कि चुनाव निर्णय अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर संबंधित वाहनों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल, प्रशासन की निष्पक्षता और आचार संहिता के सख्त पालन को लेकर सवाल और भी गहराते जा रहे हैं।

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