पाक प्रायोजित आतंकवाद पर भारत का वैश्विक कूटनीतिक वार: शशि थरूर के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका और यूरोप दौरे पर रवाना

नई दिल्ली: पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर करने के लिए भारत ने बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। इस रणनीति के तहत एक सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह अमेरिका, यूरोप समेत कई देशों के दौरे पर रवाना होगा। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कांग्रेस सांसद और विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर करेंगे। खास बात यह है कि हाल ही में कांग्रेस के भीतर आलोचना झेलने के बावजूद थरूर को यह अहम जिम्मेदारी दी गई है।
आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाने की कवायद
सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है – पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवाद को केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की समस्या के रूप में प्रस्तुत करना। प्रतिनिधिमंडल वैश्विक समुदाय का ध्यान इस गंभीर खतरे की ओर आकर्षित करेगा और आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख अपनाने की अपील करेगा।
विपक्ष और सत्ता पक्ष एक साथ
इस प्रतिनिधिमंडल में सत्ताधारी दल के साथ-साथ विपक्ष के कई प्रमुख चेहरे भी शामिल हैं, जिनमें सलमान खुर्शीद, असदुद्दीन ओवैसी, कनिमोझी, गुलाम नबी आज़ाद, प्रियांका चतुर्वेदी, सुप्रिया सुले और मनीष तिवारी जैसे नेता प्रमुख हैं।
सलमान खुर्शीद जापान का दौरा करेंगे, जबकि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे यूएई और कुछ अफ्रीकी देशों की यात्रा करेंगे।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख नेता:
- शशि थरूर
- सलमान खुर्शीद
- अनुराग ठाकुर
- रवि शंकर प्रसाद
- असदुद्दीन ओवैसी
- सुप्रिया सुले
- प्रियांका चतुर्वेदी
- गुलाम नबी आज़ाद
- कनिमोझी
- मनीष तिवारी
- बांसुरी स्वराज
- एमजे अकबर
- श्रीकांत शिंदे
- दग्गुबाती पुरंदेश्वरी
- निशिकांत दुबे
- जॉन ब्रिटास
- विक्रमजीत साहनी
- सस्मित पात्र
- समीप भट्टाचार्य
- एसएस आहलूवालिया
ऑपरेशन सिंदूर के बाद कूटनीतिक मोर्चा तेज
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने “ऑपरेशन सिंदूर” को अंजाम दिया था। इसके बाद अब सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर भी आक्रामक रणनीति अपनाई है। अमेरिका, यूरोप, जापान, यूएई, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे क्षेत्रों में ये सांसद 10 दिनों के दौरे पर जाएंगे।
पाकिस्तान वैश्विक शांति के लिए खतरा
सरकार की इस पहल को मोदी सरकार की एक निर्णायक वैश्विक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मकसद है यह दिखाना कि पाकिस्तान की धरती पर पनपने वाला आतंकवाद अब केवल भारत की समस्या नहीं, बल्कि समूची दुनिया के लिए गंभीर खतरा है।
यह अभियान अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समर्थन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
